सात दशक में बेगूसराय से मात्र छह महिलाएं ही पहुंच सकीं विधानसभा

 

बेगूसराय: सभी राजनीतिक दल महिलाओं को प्रतिनिधित्व में उचित हिस्सा देने का भरोसा चाहे जो दिलाते रहे हों, लेकिन भारतीय गणतंत्र की स्थापना के सात दशक बाद भी अब तक मात्र छह महिलाएं ही बेगूसराय से बिहार विधानसभा पहुंच सकी हैं। इस बार के‌ बिहार विधानसभा चुनाव में अलग-अलग राजनीतिक दलों से पांच विधानसभा क्षेत्र में नौ महिला उम्मीदवार अपने प्रतिद्वंदी दल के पुरुष प्रत्याशियों को कड़ी टक्कर दे रही हैं। अब देखना यह दिलचस्प है कि इनमें से कौन-कौन विधानसभा पहुंच पाती हैं।

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मभूमि के राजनीतिक इतिहास का पन्ना पलटने पर पता चलता है कि समाजवाद और साम्यवादी की पृष्ठभूमि वाले बेगूसराय के इस धरती पर भी आधी आबादी को कभी भी उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है। तभी तो विधानसभा चुनाव में महिलाओं का प्रतिनिधित्व नाम मात्र का रहा और 1952 में हुए पहलेे चुनाव से लेकर 2015 तक मात्र छह महिलाएं ही विधानसभा जाकर बेगूसराय का प्रतिनिधित्व कर सकी हैं।

सबसे पहले 1962 में कांग्रेस नेत्री गिरीश कुमारी बछबाड़ा विधानसभा क्षेत्र में तथा प्रेमा कुमारी बलिया विधानसभा क्षेत्र में अपने पुरुष प्रतिद्वंद्वियों को पराजित कर विधानसभा पहुंची। इस चुनाव में दो महिलाओं को विधायक बनने के बाद राजनीतिक सरगर्मी बदली तो 23 साल तक कोई महिला विधानसभा नहीं पहुंच पाई थी। 1985 के चुनाव में बरौनी विधानसभा क्षेत्र से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) की प्रत्याशी शकुंतला सिन्हा ने कांग्रेस के प्रत्याशी कमला देवी को हराकर विधानसभा की राह पकड़ ली, लेकिन इसके बाद फिर लंबे अंतराल तक बेेगूसराय के किसी भी क्षेेत्र से महिलाओं का प्रतिनिधित्व विधानसभा में नहीं हो पाया।

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इस बीच कांग्रेस से कृष्णा शाही और चन्द्रभानु देवी लोकसभा का चुनाव जीतकर सांसद बन गई, लेकिन कोई भी महिला 25 साल तक विधानसभा नहीं पहुंच सकी और 2010 के बाद से दो महिलाएं लगातार चुनाव जीत रही हैं। 2010 के चुनाव में जदयू ने तेजतर्रार आइएएस अधिकारी अफजल अमानुल्लाह की पत्नी परवीन अमानुल्लाह को साहेबपुरकमाल क्षेत्र से तथा राजनीतिक पृष्ठभूमि की कुमारी मंजू वर्मा को जब चेरिया बरियारपुर विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतार दिया तो लोगों ने इसे हड़बड़ी में उठाया गया कदम बताया था, लेकिन दोनों ने अप्रत्याशित रूप जीत का परचम लहरा दिया।

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2015 के चुनाव में भी यह सिलसिला कायम रहा तथा राजद, जदयू और कांग्रेस महागठबंधन ने बेगूसराय विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की उम्मीदवार अमिता भूषण को तथा चेरिया बरियारपुर से कुमारी मंजू वर्मा को मैदान में उतारा। जिसमें दोनों ने एनडीए के निवर्तमान विधायक क्रमशः सुरेन्द्र मेहता और अनिल चौधरी को जोरदार मुकाबले में कड़ी टक्कर देकर पराजित कर दिया। इस बार के चुनाव में कांग्रेस की ओर से बेगूसराय में अमिता भूषण एवं रालोसपा से संजू प्रिया। चेरिया बरियारपुर में जदयू से कुमारी मंजू वर्मा, लोजपा से राखी देवी एवं प्लुरल्स पार्टी से मधु श्वेता। बछवाड़ा में निर्दलीय इंदिरा देवी एवं जनता पार्टी की कुंदन सिंह, तेघड़ा में प्लुरल्स से रूपम कुमारी तथा मटिहानी में वंदना कुमारी चुनावी रणक्षेत्र में जोर आजमाइश कर रही है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि 2020 के इस चुनाव में कितनी महिलाएं जीत का सेहरा बांध पाती हैं।

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