क्या है Pegasus हैकिंग विवाद ? सरकार पर लगे गंभीर आरोप

 

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र की शुरूआत सोमवार को हो गई। सत्र का आगाज विपक्षी पार्टियों के जोरदार हंगामा के साथ हुआ। जिसके बाद दोनों ही सदनों की कार्रवाई को स्थगित कर दिया गया। संसद में कोरोना संकट, महंगाई और अन्य मुद्दों से ज्यादा एक और मुद्दे ने तूल पकड़ा वो है फोन हैकिंग का मामला, इसको लेकर राहुल गांधी समेत तमाम विपक्षी पार्टियों ने केंद्र सरकार को घेरा।

दरअसल बीते दिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा जारी एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत सरकार ने इजरायली सॉफ्टवेयर पेगासस के ज़रिए कई भारतीय पत्रकारों, मंत्रियों-नेताओं और कारोबारियों समेत करीब 300 लोगों के फोन हैक किए हैं। रिपोर्ट को 10 से भी ज्यादा इंटरनेशनल मीडिया कंपनियों ने छापा है। हालांकि भारत सरकार ने रिपोर्ट में किए गए सभी दावों को खारिज कर दिया है।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सभी 300 लोगों की साल 2018 से 2019 के बीच अलग-अलग मौकों पर फोन हैक किए गए या हैक करने की कोशिश की गई। इस दौरान व्हाट्सएप कॉल, फोन कॉल, रिकॉर्डिंग, लोकेशन समेत अन्य कई जानकारियां हासिल की गईं। खबरों के मुताबिक खुलासा करने वाली कंपनियों का कहना है कि वो इस रिपोर्ट के कई और कड़ियां भी जारी करेंगीं। ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि कंपनियां जल्द ही इन 300 लोगों के नाम भी बताएगी।

पेगासस क्या है ?

पेगासस स्पाइवेयर एक सॉफ्टवेयर का नाम है। जिसे इजरायली कंपनी NSO Group के ज़रिए तैयार किया गया है। यह सॉफ्टवेयर व्हाट्सऐप समेत कई अन्य मोबाइल की जानकारियां हासिल करने में सहायता करता है। साथ ही जिस मोबाइल को हैक करके जानकारियां हासिल की जाती हैं, उस मोबाइल यूजर को इस बारे में कुछ पता भी नहीं चलता है।

पेगासस बनाने वाली कंपनी ने क्या कहा ?

खबरों के मुताबिक पेगासस बनाने वाली कंपनी NSO Group का कहना है कि मीडिया रिपोर्ट्स के दावे पूरी तरह से गलत हैं। इतना ही नहीं NSO ग्रुप का कहना है कि वो रिपोर्ट छापने वालों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी कर रही है। कंपनी का कहना है कि वो सिर्फ कुछ ही देशों के कानूनी एजेंसियों को सॉफ्टवेयर देती है, जिसका लक्ष्य किसी की जान बचाना होता है।

केंद्र सरकार ने दी सफाई

पेगासस सॉफ्टवेयर से जासूसी की खबरों को लेकर उठे सवालों पर रविवार की रात आईटी मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी डॉ. राजेंद्र कुमार ने केंद्र सरकार का पक्ष रखा था। उन्होंने कहा कि देश में इंटरसेप्शन के लिए पहले से स्थापित सख्त प्रोटोकॉल है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले में ही केंद्र या राज्य सरकार की एजेंसियों सर्विलांस सिस्टम का इस्तेमाल करतीं हैं। इसकी उच्चस्तरीय निगरानी होती है।

वहीं देश के सूचना एवं प्रौद्यौगिकी मंत्री ने संसद में कहा कि देश में अवैध रूप से सर्विलांस की कोई घटना नहीं हुई है। उन्होंने कहा है कि कुछ विशेष लोगों की गवर्नमेंट सर्विलांस की बात का कोई आधार नहीं है। पहले भी वाट्सअप को पेगासस से हैक करने के संबंध में आरोप लग चुके हैं, जिसमें कोई सच्चाई नहीं है। भारतीय लोकतंत्र की छवि धूमिल करने के लिए खबरें गढ़ी जा रही हैं।