राजधानी में मनमाने दाम पर बिक रहा भुट्टा, देसी मक्का जल्द दूर करेगा किल्लत

लखनऊः बाजार में इन दिनों मक्के की धूम मची है। यह मक्का लखनऊ के अलावा अन्य जिलों का है, इसलिए दुकानदार इसे मनमाने तरीके से बेच रहे हैं। थोड़े इंतजार की जरूरत है, क्योंकि यही मक्का जल्द ही सस्ता हो जाएगा। माना जा रहा है कि आज जो मक्का अनियंत्रित दामों में बिक रहा है, उसकी कीमत लखनऊ का मक्का आते ही कम हो जाएगी।

किसानों के लिए हाईब्रिड मक्का के हजारों किस्मों में किसी एक का चयन करना मुश्किल हो जाता है। इसके बीज बाजार में उपलब्ध होने के बावजूद किसान देसी मक्का के बीज बोने के लिए विवश होते हैं। गांवों की गलियों से लेकर गल्ला मंडी तक देसी मक्का की बुवाई के लिए बीज बिकते हैं। राजधानी के किसान लोगों से ही मांगकर काम चलाते हैं। यह बात बड़ी आश्चर्य की है कि लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी है, इसके बावजूद भी यहां मक्का जैसी खेती को प्रोत्साहित करने के लिए प्रयास नहीं किए जाते हैं।

बारिश में भुट्टा की कीमत प्रति पीस दस रूपये होती है। इसका कारण है कि यह भुट्टा बाराबंकी से लाया जाता है। औने-पौने दाम पर वहां के किसान इसे बेचते हैं और राजधानी में यह फैशन में शुमार होने के कारण काफी महंगा बिकता है। गोमतीनगर स्थित मिठाईलाल चौराहे पर मक्के का भुट्टा बेच रहे सूरज का कहना है कि यह मक्का जल्द ही सस्ता होगा। अभी लखनऊ का मक्का आना है। जैसे ही यह बाजार में आ जाएगा, भुट्टा सस्ता हो जाएगा। एक जानकारी के अनुसार, भुट्टा पिछले साल 20 रूपये में 10 पीस तक इसी चौराहे में बिका था। इस बार लॉकडाउन के कारण भाड़ा खल रहा है।

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इससे महंगाई स्वाभाविक है, लेकिन इसकी कीमत में लखनऊ के मक्के को आते ही कम हो जाएगी। राजधानी के आस-पास के गांवों में इसको बड़े पैमाने पर बोया गया है। माना जा रहा है कि मौसम में बदलाव के कारण इस बार फसलों की बुवाई पिछड़ी है। हाईब्रिड मक्का की सबसे कम अवधि फसल भी करीब 3 माह लेती है। देसी मक्का की फसल दो माह में ही पककर तैयार हो जाती है। इसके चलते किसान बड़े पैमाने पर इसकी बुवाई कर रहे हैं। गांव फत्तेपुर, सिसेंडी, मोहनलालगंज, अमौसी, चकौली आदि में काफी मात्रा में मक्का बोया गया है।