कोई दुविधा नहीं, 11 को ही मनाइए रक्षा बंधन

लखनऊः रक्षाबंधन के पर्व की तिथि को लेकर इस बार असमंजस की स्थिति बनी है। ग्यारह और बारह अगस्त को दो दिन पूर्णिमा तिथि होने से यह स्थिति बन रही है। इसके साथ ही पूर्णिमा में भद्रा काल होने से रक्षा बंधन के पर्व को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इस बार रक्षाबंधन किस दिन मनाया जाए, इसको लेकर कई अलग-अलग राय हैं। वहीं, काशी हिंदू विवि से प्रकाशित विश्व पंचांग और दिल्ली के श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विवि से प्रकाशित विद्यापीठ पंचांग में 12 अगस्त को रक्षासूत्र बांधने की सलाह दी गई है। रक्षा बंधन को लेकर फैले असमंजस को दूर करने और बहनों को राखी बांधने के सही समय और तारीख के बारे में जानकारी देने हेतु इंडिया पब्लिक खबर के संवाददाता पवन सिंह चौहान ने राजधानी लखनऊ के प्रकाण्ड ज्योतिषाचार्य पण्डित लोकेन्द्र चतुर्वेदी से बात की। उन्होंने बताया कि भारतीय परंपरा में श्रावण शुक्ल की पूर्णिमा तिथि को रक्षा बंधन का पर्व मनाया जाता है।

ज्योतिषाचार्य पण्डित लोकेन्द्र चतुर्वेदी के मुताबिक, इस बार सबसे ज्यादा विवाद इस बात को लेकर हो रहा है कि 11 अगस्त को श्रावण शुक्ल की पूर्णिमा तो है लेकिन इस दिन भद्रा काल भी पड़ रहा है। जो 11 तारीख को ही 8 बजकर 25 मिनट पर समाप्त हो रही है। तो रक्षा बंधन का सही समय रात 8 बजकर 25 मिनट के बाद शुरू होता है। यह अधूरी बात है। इसके अलावा पूर्णिमा की तिथि अगले दिन 12 अगस्त को सुबह 7 बजकर 16 मिनट तक मिलेगी। यह तो तय है कि रक्षा बंधन पूर्णिमा की तिथि को ही होना चाहिए। प्रतिपदा लगनी ही नहीं चाहिए। अगर कोई चाहता है तो वह 12 तारीख को सुबह 7 बजकर 16 मिनट तक रक्षा पर्व मना सकता है। इसमें कोई दोष नहीं।

ज्योतिषाचार्य पण्डित लोकेन्द्र चतुर्वेदी ने बताया कि अब जहां तक भद्रा की बात आती है तो 11 अगस्त को पूर्णिमा लगने के साथ ही भद्रा भी लग रही है। यह सत्य है। 11 अगस्त को भद्रा सुबह 9 बजकर 35 मिनट से रात्रि 8 बजकर 25 मिनट तक रहेगी। इसके अलावा भद्रा का निवास देखना भी जरूरी है। क्या भद्रा पृथ्वी लोक में है। तो शास्त्रानुसार उस दिन मकर राशि में चन्द्रमा होने से भद्रा का निवास पाताल लोक में होगा। पाताल की भद्रा का पृथ्वी लोक के लिए कोई महत्व नहीं अर्थात भद्रा का कोई दोष नहीं है। इसलिए निर्विवाद रूप से भद्रा के पाताल लोक में होने से पृथ्वी लोक पर इसका कोई दोष नहीं है।

11 को ही मनाया जाना चाहिए रक्षा बंधन

ज्योतिषाचार्य पण्डित लोकेन्द्र चतुर्वेदी ने कहा कि सर्वमत शात्रीय प्रमाण से 11 अगस्त 2022 को सुबह 9 बजकर 35 मिनट के बाद पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ होती है। पूर्णिमा में ही रक्षा बंधन करना चाहिए इसलिए 11 तारीख को पूरे दिन किसी भी समय बहने रक्षा सूत्र भाईयों को बांध सकती हैं।

महावीर पंचाग के अनुसार

11 अगस्त 2022 को चुतुर्दशी तिथि 9:35 प्रातः तक रहेगी उसके उपरान्त 9:36 से पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ होगी।
जो 12 अगस्त 2022 को प्रातः 7:16 बजे तक रहेगी।
एवं
भद्रा दिन में 9:35 से प्रारम्भ होकर रात्रि 8:25 बजे तक रहेगी।

चन्द्र के मकर राशि में होने से भद्रा का निवास पाताल लोक होता है इसलिए इसका पृथ्वी लोक पर कोई दोष नहीं होगा।
इसलिए 11 अगस्त 2022 को पूरे दिन राखी का त्यौहार मनाया जाएगा और बहने भाई की कलाई में राखी बांध सकती हैं।

रक्षा बंधन की पौराणिक कथा एवं महिमा

प्राचीन काल में एक बार बारह वर्षों तक देवासुर-संग्राम होता रहा, जिसमें देवताओं का पराभव हुआ और असुरों ने स्वर्ग पर अधिपत्य कर लिया। दुखी पराजित और चिन्तित देवराज इन्द्र देवगुरू बृहस्पति के पास गए और सादर प्रमाण कर कहने लगे कि इस समय न तो मैं यहां ही सुरक्षित हूं और न ही यहां से कहीं निकल ही सकता हूं। ऐसी दशा में मेरा युद्ध करना ही अनिवार्य है, जबकि अब तक के युद्ध में हमारी पराजय ही हुई है। इस बात को सुनकर देवगुरू ब्रहस्पति ने अजेय होने का विधान बताया उन्होंने इन्द्र से कहा श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को मैं विधानपूर्वक रक्षा सूत्र का निर्माण करूंगा, जिसके धारण से निश्चित रूप से विजय प्राप्त होगी। इस प्रकार देवगुरू बृहस्पति ने देवराज इन्द्र एवं समस्त देवताओं को श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के दिन रक्षा बंधन करवाया। जिसके प्रभाव से उनकी विजय हुई। तब से यह पर्व मनाया जाने लगा। इस दिन ब्राहमण अपने यजमान को रक्षासूत्र का पूजन कर रक्षाबंधन करते हैं। इस दिन बहने भी भाइयों की कलाई में रक्षासूत्र बांधती हैं।