भगवान श्रीगणेश के ध्यान मात्र होती है सर्व सिद्धियों के प्राप्ति

नई दिल्लीः भगवान श्रीगणेश समस्त देवी-देवताओं में प्रथम पूज्य हैं और हिंदू धर्म में कोई भी शुभ कार्य करने से पहले उनकी पूजा की जाती है। कोई भी व्रत, पर्व, त्यौहार या मांगलिक कार्य हों, सबसे पहले श्रीगणेश की पूजा की जाती है। शास्त्रों में वर्णित है कि यदि किसी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा नहीं की जाती है, तो वह कार्य सिद्ध नहीं होता है। गणेश जी के सबसे पहले पूजन के पीछे कई कथाएं प्रचलित हैं। कथा के अनुसार, एक बार दोनों शिव पुत्र बालक गणेश और कार्तिकेय के बीच इस बात को लेकर बहस होने लगी कि माता-पिता को कौन सबसे ज्यादा प्रिय है।

जब यह बात भगवान शिव को पता चली, तो उन्होंने दोनों के बीच छिड़ी बहस को शांत करने के लिए एक प्रतियोगिता का आयोजन करने की सोची। इसमें सभी देवी-देवता मौजूद थे। इसके बाद भगवान शिव ने कहा जो भी अपने-अपने वाहन से पृथ्वी का चक्कर लगाकर सबसे पहले आएगा, वही विजेता होगा। पिता की बात सुनकर कार्तिकेय फौरन ही अपने वाहन मोर पर सवार होकर पृथ्वी का चक्कर लगाने के लिए निकल पड़े। वहीं भगवान गणेश भी अपने वाहन चूहे के साथ तैयार हुए तभी उनके दिमाग में एक बात आई क्यों न अपने माता-पिता के ही चक्कर लगा लूं।

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इस संसार में माता-पिता से बड़ा और कोई भी नहीं है। तब भगवान गणेश ने अपने माता-पिता की सात परिक्रमा की। जब कार्तिकेय पृथ्वी का चक्कर लगाकर लौटे, तो सभी देवी-देवताओं ने भगवान गणेश को विजेता घोषित किया। तभी से सबसे पहले किसी भी पूजा या धार्मिक अनुष्ठान में सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा की जाने लगी। एक अन्य कथा के मुताबिक सभी देवी-देवताओं ने भगवान गणेश को आशीर्वाद दिया था कि सबसे पहले गणपति ही पूजनीय होंगे। गणेष जी को विघ्नहर्ता और सर्वसिद्धियों का दाता कहा जाता है। उनके पूजन मात्र से ही मनुष्य के जीवन में व्याप्त सभी विघ्न दूर हो जाते हैं और सभी सिद्धियां भी प्राप्त हो जाती हैं।

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