Ram Janmabhoomi: आंदोलन के अहम नायक थे श्रीशचंद्र दीक्षित

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Ram Janmabhoomi: भगवान श्री राम लला की प्राण प्रतिष्ठा का समय नजदीक आ रहा है और लोगों के मन में ऐसे वीरों की यादें भी ताजा हो रही हैं। जिसके चलते उन्हें ये देखने का मौका मिल रहा है। इसी प्रकार श्रीशचन्द्र दीक्षित इस आन्दोलन के एक महत्वपूर्ण नेता थे। जिन्होंने इस आंदोलन में अहम भूमिका निभाते हुए न सिर्फ कार सेवकों का नेतृत्व किया बल्कि कई लोगों की जान भी बचाई। पुलिस प्रमुख के रूप में उनके अनुभव और कौशल ने इस आंदोलन की रीढ़ की हड्डी के रूप में काम किया।

जन-जन तक पहुंचा आंदोलन

रायबरेली के लालगंज के सोतवा खेड़ा गांव के मूल निवासी श्रीशचंद्र दीक्षित का जन्म 3 जनवरी 1926 को हुआ था। वह 1982 से 1984 तक उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक रहे। दीक्षित एक तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी माने जाते थे। इससे पहले वह प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के मुख्य सुरक्षा अधिकारी भी रह चुके हैं।

1984 में सेवानिवृत्ति के बाद वह राम मंदिर आंदोलन में शामिल हो गये। राम मंदिर आंदोलन के प्रणेता अशोक सिंघल के आग्रह पर वे विश्व हिंदू परिषद से जुड़े और केंद्रीय उपाध्यक्ष बने। वह श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य भी थे। श्रीशचंद्र दीक्षित विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल के विश्वासपात्र माने जाते थे। आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने में उनकी विशेष भूमिका थी। आंदोलन के दौरान वह लगातार पुलिस प्रशासन को चकमा देने में सफल रहे।

वह अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रखने वालों में से एक थे। 1989 में प्रयाग में कुम्भ के अवसर पर आयोजित धर्मसंसद में मन्दिर शिलान्यास कार्यक्रम की घोषणा की गयी। इसके बाद श्रीशचंद्र दीक्षित ने देवरहा बाबा द्वारा दी गई ईंट को अपने सिर पर लेकर पूरे देश का भ्रमण किया।

कारसेवकों की बचाई जान

उन्हें अक्टूबर-नवंबर 1990 में कारसेवा कार्यक्रम की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी दी गई थी। उनकी जिम्मेदारी कारसेवकों को सुरक्षित रूप से अयोध्या ले जाना था। गौरतलब है कि बड़ी संख्या में कार सेवक और साधु-संत अयोध्या कूच कर रहे थे और भीड़ अयोध्या पहुंचने लगी थी। प्रशासन ने अयोध्या में कर्फ्यू लगा दिया था। पुलिस ने विवादित स्थल के 1.5 किलोमीटर के दायरे में अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था कर रखी थी। इसी बीच 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में कारसेवकों की भीड़ पर पुलिस ने फायरिंग शुरू कर दी, लेकिन इसी बीच कारसेवकों के एक समूह का नेतृत्व कर रहे पूर्व पुलिस महानिदेशक श्रीश चंद्र दीक्षित आगे आ गये। उन्हें सामने देखकर पुलिसवालों ने फायरिंग बंद कर दी। जिससे कई निहत्थे कारसेवकों की जान बच गयी।

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वरिष्ठ पत्रकार अच्युतानंद मिश्र के मुताबिक, श्रीश चंद्र दीक्षित राम मंदिर आंदोलन के अग्रणी नेताओं में से थे और उन्होंने आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने में विशेष भूमिका निभाई थी। राम मंदिर आंदोलन के इस नायक को भारतीय जनता पार्टी ने वाराणसी से लोकसभा का टिकट दिया और वह वाराणसी से पहले कमल खिलाने वाले सांसद बने। राम मंदिर आंदोलन के नेता श्रीश चंद्र दीक्षित का 8 अप्रैल 2014 को निधन हो गया।

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