जी-7 घोषणा पत्र में भारतीय विचारों का समावेश

जी 7 शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री ने कोरोना आपदा प्रबंधन, वैक्सीनेशन, जलवायु व पर्यावरण संरक्षण, आतंकवाद आदि पर उपयोगी विचार प्रस्तुत किये। इनका महत्व इसलिए था क्योंकि इसमें पूरी मानवता के कल्याण का भारतीय चिंतन शामिल था। मोदी ने संकट के समय सभी देशों से एकजुट प्रयास का आह्वान किया। मोदी ने चीन का नाम नहीं लिया लेकिन विस्तारवादी और अमानवीय दृष्टिकोण रखने वाली ताकतों पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता बताई थी। शिखर सम्मेलन के साझा घोषणापत्र में इन सभी बातों का समावेश किया गया।

वैक्सीनेशन, बड़ी कंपनियों का टैक्स भुगतान करना, जलवायु परिवर्तन के समाधान जैसे मुद्दों पर सहमति व्यक्त की गई। कोरोना महामारी से हुए नुकसान को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर दिया। वैश्विक स्वास्थ्य,हरित ऊर्जा, आधारभूत संरचना और शिक्षा के लिए मदद करने का भी वादा किया गया। कोरोना से जूझ रहे देशों को एक अरब वैक्सीन डोज उपलब्ध कराई जाएगी। गरीब देशों को कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद के लिए सौ अरब डॉलर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही चीन पर दबाव बनाया जाएगा। कोरोना की उत्पत्ति के संबन्ध में जांच होगी। कहा गया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था को कमजोर करने वाली बाजार विरोधी नीतियों पर नियंत्रण किया जाएगा।

जी-7 संगठन में दुनिया के विकसित देश शामिल हैं। भारत, चीन और रूस बड़ी अर्थव्यवस्था के देश है। किंतु ये देश जी 7 सदस्यता हेतु निर्धारित बिंदुओं को पूरा नहीं करते। इसके बावजूद इसके शिखर सम्मेलन में चीन व रूस को दरकिनार कर भारत को विशेष रूप में आमंत्रित किया गया। ब्रिटेन की अध्यक्षता में यह सम्मेलन होना था। नरेंद्र मोदी को आमंत्रण देने के लिए ब्रिटिश प्रधानमंत्री की भारत यात्रा प्रस्तावित थी लेकिन कोरोना की दूसरी लहर के कारण यह यात्रा स्थगित की गई थी। उन्होंने वर्चुअल माध्यम से नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया। इतना ही नहीं इस वर्चुअल बैठक में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने वाले अनेक समझौते भी हुए थे।

यहां कहने का मतलब यह कि जी 7 भारत को अपना स्वभाविक सहयोगी मानता है। जबकि चीन व रूस उनकी सूची के बाहर है। इसका बड़ा कारण यह है कि भारत विश्व शांति, सहयोग व सौहार्द के लिए प्रतिबद्ध रहा है। कोरोना की पहली लहर में भारत ने विकसित देशों की सहायता की थी। आतंकवाद को वैश्विक खतरा मानते हुए भारत ने सदैव इसका विरोध किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र संघ में आतंकवाद के विरुद्ध साझा रणनीति बनाने का प्रस्ताव किया था। जी 7 देश भी इस प्रस्ताव की उपयोगिता समझते है। इसके अलावा जलवायु व पर्यावरण के संबन्ध में भी भारत विश्व कल्याण के अनुरूप प्रस्ताव करता रहा है।

विगत एक वर्ष कोरोना की पहली दूसरी लहर ने दुनिया परेशान किया है। जी 7 का शिखर सम्मेलन अभूतपूर्व संकट के दौरान हुआ। दुनिया में कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप है। इन दोनों कोरोना लहरों के सामने विकसित देश भी लाचार नजर आए। जबकि वहां की स्वास्थ्य सेवाएं बहुत सुदृढ़ हैं। लेकिन वहां की सरकारें महामारी का ठीक से सामना करने में असमर्थ रही। कोरोना की पहली लहर के दौरान भारत ने विकसित देशों को स्वास्थ्य संबन्धी सुविधा व सामग्री उपलब्ध कराई थी। दूसरी लहर में ऑक्सीजन की मांग चार से पांच गुना बढ़ी तब विकसित देश भारत की सहायता के लिए आगे बढ़े। अमेरिकी राष्ट्रपति जो वाइडेन ने कहा था कि अमेरिका संकट के समय भारत द्वारा दी गई सहायता को कभी भूल नहीं सकता। इसलिए भारत को ऑक्सीजन व वैक्सीन हेतु कच्चे माल की पर्याप्त आपूर्ति की गई।

परस्पर सहयोग के इस अध्याय का एक बड़ा सन्देश भी है। वैश्विक महामारी के दौरान विकसित से लेकर अन्य सभी देशों को एक-दूसरे के सहयोग की आवश्यकता पड़ सकती है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल माध्यम से शिखर सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने कोरोना के दौरान हुए अनुभव को रेखांकित किया। कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने हेतु दुनिया के देशों को साझा प्रयास करने चाहिए। सभी जरूरतमंदों तक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। नरेंद्र मोदी ने वन अर्थ वन हेल्थ का आह्वान किया। मोदी ने जी-7 के बिल्डिंग बैक स्ट्रांगर हेल्थ संपर्क सत्र को संबोधित किया।

महामारी से निपटने के लिए भारत के समग्र समाज के दृष्टिकोण को रेखांकित किया और सरकार, उद्योग और सिविल सोसाइटी के प्रत्येक स्तर पर प्रयासों में तालमेल के बारे में बताया। उन्होंने भविष्य की महामारी को रोकने के लिए वैश्विक एकजुटता, नेतृत्व और तालमेल को अपरिहार्य बताया। चुनौती से निपटने के लिए लोकतांत्रिक और पारदर्शी समाजों की विशेष जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री ने संपर्क का पता लगाने और टीकों के प्रबंधन के लिए ओपन सोर्स डिजिटल प्रणाली के सफल इस्तेमाल के बारे में भी बताया और दूसरे विकासशील देशों के साथ अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा करने की इच्छा प्रकट की।

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मौरिसन ने सम्मेलन में नरेंद्र मोदी से इस मुद्दे पर वर्चुअल बात की और प्रस्ताव को डब्ल्यूटीओ में अपने देश का मजबूत समर्थन देने का वादा किया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमेनुएल मैक्रों ने भारत समेत दूसरे देशों को वैक्सीन के कच्चे माल की आपूर्ति में छूट देने का प्रस्ताव किया। उन्होंने कच्चे माल से बैन हटाने की मांग की और कहा कि वैक्सीन बनाने वाले देशों को इसके लिए कच्चा माल मिलना चाहिए। जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल ने नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया और कुछ अन्य देशों ने भी कोविड टीकों का उत्पादन बढ़ाने के लिए पेटेंट पर छूट के मोदी के आह्वान का भी समर्थन किया है। भारत और दक्षिण अफ्रीका ने विश्व व्यापार संगठन में यह प्रस्ताव रखा है। सम्मेलन में कोरोना वायरस, फ्री ट्रेड और पर्यावरण पर विस्तार से चर्चा हुई। ज्यादा फोकस इसी बात पर रहा कि कैसे दुनिया को कोरोना महामारी से मुक्त करना है।

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भारत G7 का सदस्य नहीं है। भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और दक्षिण अफ्रीका को भी इसमें आमंत्रित किया गया। नरेंद्र मोदी ने कोविड संबंधी प्रौद्योगिकियों पर पेटेंट छूट के संबंध में भारत, दक्षिण अफ्रीका द्वारा डब्ल्यूटीओ में दिए गए प्रस्ताव के लिए जी-7 के समर्थन का भी आह्वान किया। जी-7 में ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और अमेरिका शामिल हैं। मुक्त समाज एवं मुक्त अर्थव्यवस्था सत्र में नरेंद्र मोदी एक प्रमुख वक्ता के तौर पर शामिल हुए। इसमें उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था, विचारों की उदारता व स्वतंत्रता के प्रति भारत की पारंपरिक प्रतिबद्धता के बारे में बताया और कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के नाते भारत सत्तावादी व्यवस्था, आतंकवाद व हिंसक अतिवाद, गलत सूचना के प्रसार और आर्थि‍क दबाव की रणनीति से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने के लिए जी-7 और मेहमान देशों का प्राकृतिक तौर पर मित्र राष्ट्र है।

कोरोना संकट पर चर्चा के दौरान चीन भी निशाने पर रहा। बैठक में कोरोना महामारी के खिलाफ एक वैश्विक रणनीति पर सहमति बनी। इसके साथ ही हिंद प्रशांत क्षेत्र की स्थिति पर भी विचार विमर्श किया गया। सामूहिक तौर पर हिंद प्रशांत क्षेत्र को दुनिया के सभी देशों के लिए एक समान अवसर वाला बनाने पर जोर दिया गया है। साथ ही इन देशों ने यह कहा है कि इस उद्देश्य के लिए इस क्षेत्र के दूसरे देशों के साथ साझेदारी व सहयोग किया जाएगा। जी 7 शिखर सम्मेलन में ग्यारह देश शामिल हुए। इनमें चार देश भारत अमेरिका, आस्ट्रेलिया व जापान क्वाड गठबंधन में शामिल हैं। इनके बीच भी इस दौरान विचार विमर्श किया गया। इसमें कुछ दूसरे बड़े लोकतांत्रिक देशों को शामिल करने को लेकर पहले से ही संबंधित देशों में बात चल रही है।

                                                                                                              डॉ. दिलीप अग्निहोत्री