शिमला (Himachal Pradesh): हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक साल बाद पहली बार अपनी सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार किया है। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने राजेश धर्माणी और यादवेंद्र गोमा को कैबिनेट मंत्री पद की शपथ दिलाई। दोनों नेता इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से हैं। दोनों बीटेक और एमबीए डिग्री धारक हैं।
मंगलवार दोपहर राजभवन में आयोजित एक सादे समारोह में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने बिलासपुर जिले के घुमारवीं से राजेश धर्माणी और कांगड़ा जिले के जयसिंहपुर से यादवेंद्र गोमा को कैबिनेट मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। नए मंत्रियों में सबसे पहले राजेश धर्माणी और फिर यादवेंद्र गोमा ने शपथ ली। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
क्षेत्रीय और जातीय समीकरण साधने की कोशिश
आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने कैबिनेट विस्तार में दो मंत्री बनाकर जातीय और क्षेत्रीय संतुलन भी साधने की कोशिश की है। राजेश धर्माणी को कैबिनेट में लेने से उन्हें ब्राह्मण समुदाय के बीच तरजीह मिली है।अब सुक्खू कैबिनेट में ब्राह्मण समुदाय से दो लोगों को प्रतिनिधित्व मिला है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री भी ब्राह्मण हैं। यादविंदर गोमा को कैबिनेट में मंत्री बनाकर अनुसूचित जाति को तरजीह दी गई है। वर्तमान में सुक्खू कैबिनेट में शामिल धनीराम शांडिल भी अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं। क्षेत्रीय संतुलन की बात करें तो कैबिनेट विस्तार में हमीरपुर और कांगड़ा संसदीय क्षेत्रों को महत्व मिला है। धर्माणी के मंत्री बनने से हमीरपुर संसदीय क्षेत्र राजनीतिक रूप से मजबूत होगा। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी इसी संसदीय क्षेत्र से हैं। फिलहाल केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर यहां से सांसद हैं। कांगड़ा संसदीय क्षेत्र को यादविंदर गोमा के रूप में दूसरा मंत्री मिल गया है। लंबे समय से कांगड़ा जिले से एक मंत्री बनाए जाने की चर्चा चल रही थी। वर्तमान में कांगड़ा से चंद्र कुमार कृषि मंत्री हैं और चंबा जिले से विधायक कुलदीप पठानिया विधानसभा अध्यक्ष हैं।
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साफ-सुथरी छवि वाले नेता हैं राजेश धर्माणी
51 वर्षीय राजेश धर्माणी बिलासपुर जिले से एकमात्र कांग्रेस विधायक हैं। वह तीन बार से विधायक हैं और पहली बार उन्हें मंत्री पद दिया गया है। राजेश धर्माणी स्वच्छ छवि के राजनेता हैं। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। एनआईटी हमीरपुर से बीटेक करने वाले राजेश धर्माणी ने इग्नू से एमबीए की डिग्री भी हासिल की है। उनके परिवार में उनकी पत्नी और एक बेटी है। राजेश धर्माणी कांग्रेस संगठन में अहम पदों पर रह चुके हैं। एआईसीसी में सचिव रहने के अलावा वह उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। राजेश धर्माणी का सफर संघर्षपूर्ण रहा है। उन्होंने अपनी ईमानदार छवि के कारण जनता के बीच पहचान बनाई है। उन्होंने पहला चुनाव साल 2007 में जीता था और उसके बाद साल 2012 में भी चुनाव जीतकर उन्होंने जनता की सेवा की। हालांकि 2017 के विधानसभा चुनाव में वह हार गए थे। लेकिन, इस बार जनता ने उन्हें फिर से चुनकर विधानसभा भेजा है। राजेश धर्माणी ने अपने क्षेत्र घुमारवीं में शिक्षा, स्वास्थ्य सहित अन्य विकासात्मक योजनाओं पर फोकस किया था। वह स्वयंसेवी संस्था संवेदना के संस्थापक सदस्य भी हैं। यह संस्था गरीब बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाती है। इसके अलावा यह विधवाओं और उनके बच्चों को वित्तीय मदद भी प्रदान करता है।
यादवेंद्र गोमा को विरासत में मिली राजनीति
यादवेंद्र गोमा के पिता मिल्खी राम गोमा भी कांगड़ा जिले के जयसिंहपुर से विधायक रह चुके हैं। 37 वर्षीय यादवेंद्र गोमा का जन्म पालमपुर में हुआ था। उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद एमबीए की डिग्री ली। उसे एक बेटी है। उनका राजनीतिक सफर यूथ कांग्रेस से शुरू हुआ। यादवेंद्र गोमा 2010 से 2015 तक जयसिंहपुर युवा कांग्रेस के अध्यक्ष रहे हैं। 2019 से 2021 तक वह हिमाचल प्रदेश कांग्रेस एससी सेल के अध्यक्ष रहे। गोमा वर्ष 2012 के विस चुनाव में पहली बार विधानसभा पहुंचे। तब उनकी आयु महज 26 वर्ष थी और वह सबसे युवा विधायक थे।
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