उत्तराखंडः उत्तराखंड के चमोली जनपद में भारत तिब्बत सीमा क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने से भारी तबाही हुई है। ऐसा भी अंदेशा जताया जा रहा है कि धौली गंगा में जलस्तर में भारी बढ़ोतरी से बड़ी संख्या में लोग भी बह गये होगें। पूरे इलाके में इससे अफरातफरी की स्थिति बनी हुई है। वहीं ग्लेशियर फटने की घटना के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत चमोली के लिए रवाना हो गये हैं और यहां हालात का जायजा लेंगे। दूसरी ओर आपदा में फंसे लोग राहत के लिए आपदा परिचालन केंद्र के नम्बर 1070 या 9557444486 पर संपर्क कर सकते हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ट्वीट कर लोगों से अफवाह ने फैलाने की भी अपील की है।
मैं स्वयं घटनास्थल के लिए रवाना हो रहा हूँ – मेरी सभी से विनती है कि कृपया कोई भी पुराने video share कर panic ना फैलाएँ। स्थिति से निपटने के सभी ज़रूरी कदम उठा लिए गए हैं । आप सभी धैर्य बनाए रखें।
— Trivendra Singh Rawat (@tsrawatbjp) February 7, 2021
हादसे में चमोली-ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट को भारी नुकसान होने की बात सामने आई है। तपोवन बैराज पूरी तरह ध्वस्त होने की सूचना मिल रही है। नदी के किनारे बसे तमाम इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। घटना पर जिला प्रशासन व एनडीआरएफ के अधिकारी व कर्मचारी पहुंच गए हैं। राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आपदा प्रबंधन सचिव और चमोली के जिलाधिकारी से घटना की जानकारी लेकर जरूरी निर्देश दिये हैं।
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एनडीआरएफ के जोशीमठ पोस्ट के हेड कांस्टेबल मंगल सिंह के अनुसार जोशीमठ थाना द्वारा रैणी गांव में ग्लेशियर टूटने की सूचना दी गयी जिसके बाद तत्काल टीम को घटनास्थल के लिए रवाना कर दिया गया। जानकारी के मुताबिक इस घटना में तीन सौ से अधिक लोगों के धौली गंगा में बह जाने के अनुमान है। इससे चमोली-ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट को भारी नुकसान पहुंचा है। चमोली, रुद्रप्रयाग, ऋषिकेश और हरिद्वार तक नदी के तटवर्ती इलाकों में बसे लोगों को अलर्ट किया गया है। गंगा नदी में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। गंगा के तटवर्ती इलाके को खाली कराया जा रहा है। धौली गंगा और अलकनंदा के किनारे बसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है। लोगों को गंगा के किनारे नहीं जाने की सलाह दी गई है। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ को अलर्ट पर रखा गया है।