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क्षमाशीलता ही व्यक्ति को बनाती है ताकतवर

लखनऊ : महात्मा गांधी भारतीय इतिहास के एक ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्होंने देशहित के लिए अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ी। वह आजादी के आंदोलन के एक ऐसे नेता थे, जिन्होंने अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए अंग्रेजी शासकों के नाक में दम कर दिया था। महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता के नाम से भी संबोधित किया जाता है। उनकी सत्य और अहिंसा की विचारधारा से मार्टिन लूथर किंग और नेल्सन मंडेला भी काफी प्रभावित थे। महात्मा गांधी ने अफ्रीका में भी लगातार 21 वर्षों तक अन्याय और नस्लीभेद के खिलाफ अहिंसक रूप से संघर्ष किया, जो अंग्रेजों को अफ्रीका में ही नहीं बल्कि भारत में भी महंगा पड़ा। गांधी जी ने तमाम अनमोल विचार दिए थे, जिनके विचारों से प्रेरणा लेकर तमाम युवाओं ने अहिंसा को ही अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया।

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महात्मा गांधी का कहना था कि स्वास्थ्य ही असली संपत्ति है, न कि सोना और चांदी। यदि आप स्वस्थ्य हैं तो यह भी आपके लिए किसी संपत्ति से कम नही है। ऐसे में हर व्यक्ति को अपनी दिनचर्या में व्यायाम व योग को जरूर शामिल करना चाहिए। यदि आप नियमित इनका पालन करते हैं, तो आपका शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहेगा। गांधी जी का कहना था कि किसी देश की महानता और उसकी नैतिक उन्नति का अंदाजा हम वहां जानवरों के साथ होने वाले व्यवहार से लगा सकते हैं। कोई भी देश तभी महान होता है, जब वहां पर आम लोगों के साथ-साथ पशु भी पूरी स्वतंत्रता के साथ रहते हों। जब हर व्यक्ति के अंदर मानवता होगी और उसे प्रकृति के साथ उसके सहचरी तत्वों से भी लगाव होगा, तभी यह सामंजस्य बन पाएगा।

महात्मा गांधी कहते थे कि गौरव लक्ष्य पाने के लिए कोशिश करने में हैं, न कि लक्ष्य तक पहुंचने में यानी हर व्यक्ति को अपने लक्ष्यों का निर्धारण कर उसे हासिल के लिए भरसक प्रयत्न करना चाहिए। यदि आप लक्ष्य को पाने की दिशा में आगे बढ़कर उसके लिए प्रयत्न नहीं करेंगे और उसके बीच आने वाली कठिनाईयों का मुकाबला नहीं करेंगे, तब तक आपको उस लक्ष्य की पूर्ति नहीं होगी। यही नहीं जब आपको संघर्षों के बाद लक्ष्य की प्राप्ति होगी, तो उसका आनंद असीम होगा। गांधी जी कहते थे कि कमजोर कभी क्षमाशील नहीं हो सकता है। क्षमाशीलता ताकतवर की निशानी है। जो व्यक्ति दूसरे की गलतियों को क्षमा कर देता है, वह व्यक्ति ही असली ताकतवर होता है। यदि आपके अंदर क्षमाशीलता का गुण नहीं है तो आप न तो समाज में उचित सम्मान प्राप्त कर सकते हैं और न ही महान बन सकते हैं।

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