लखनऊः परिवहन विभाग की हेल्पलाइन सेवा (1800-1800-151) के टेंडर की फाइनेंशियल बिड 06 माह में भी नहीं खुल पाई। अब साल भर से बगैर रिनुअल हेल्पलाइन सेवा संचालित हो रही है। बीते जुलाई माह में हेल्पलाइन के टेंडर की टेक्निकल बिड भी खुल चुकी है, बावजूद इसके न तो अभी तक फाइनेंशियल बिड खोले जाने का खाका तैयार हो सका और न ही टेंडर प्रक्रिया पूरी हो सकी।
उल्लेखनीय है कि परिवहन विभाग ने वर्ष 2013 में हेल्पलाइन सेवा शुरू की थी। उस दौरान बिना टेंडर के हेल्पलाइन सेवा बीएसएनएल को संचालित करने के लिए दी गई थी। बीते करीब 10 वर्षों से बीएसएनएल भी हेल्पलाइन सेवा को सबलेट कम्पनी (रामा इन्फोटेक) के जरिए संचालित करा रहा है। प्रत्येक वर्ष हेल्पलाइन सेवा को परिवहन विभाग शासन से रिनुअल करा लेता था। हालांकि, इस बार सेवा प्रदाता के चयन को लेकर जारी टेंडर प्रक्रिया के चलते रिनुअल नहीं कराया। अब टेंडर प्रक्रिया आगे न बढ़ने और बगैर रिनुअल के हेल्पलाइन सेवा संचालित होने के चलते सवाल खड़े हो रहे हैं, बावजूद इसके विभाग न तो नए सेवा प्रदाता के चयन को लेकर टेंडर प्रक्रिया पूरी कर रहा है और न ही इसका रिनुअल कराया जा रहा है।
ओपेन व्यवस्था के जरिए वर्ष 2013 में शुरू की गई हेल्पलाइन सेवा पर विभाग हर माह करीब 5-6 लाख रुपए खर्च कर रहा है, वहीं हेल्पलाइन सेवा पर सालाना खर्च करीब 50-60 लाख रुपए है। हेल्पलाइन सेवा पर अधिक खर्च को देखते हुए पूर्व परिवहन आयुक्त धीरज साहू ने टेंडर के जरिए सेवा प्रदाता के चयन पर जोर दिया था, ताकि हेल्पलाइन सेवा पर हो रहे अधिक खर्च को कम किया जा सके। जिसके बाद परिवहन विभाग मुख्यालय पर हेल्पलाइन सेवा के लिए टेंडर तैयार कराया गया। हालांकि, बीते जून माह में उनके तबादले के बाद यह प्रक्रिया धीमी पड़ गई। हेल्पलाइन सेवा का टेंडर प्रकाशित कर टेक्निकल बिड तो खोल दी गई, लेकिन इसके बाद की प्रक्रिया पर अभी तक ग्रहण लगा हुआ है।
सात की जगह काम करते मिले सिर्फ दो कर्मी
शुरूआत में परिवहन विभाग की हेल्पलाइन सेवा परिवहन विभाग मुख्यालय की जगह अन्यत्र संचालित की जा रही थी। विभागीय अफसरों को हेल्पलाइन सेवा के सुचारू संचालन न होने सम्बंधी तमाम शिकायतें भी मिल रही थीं। शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जब अफसरों ने औचक निरीक्षण किया, तो मामला सही पाया गया। निरीक्षण के समय सात की जगह सिर्फ दो कर्मचारी हेल्पलाइन सेवा में कार्य करते पाए गए। जिसके बाद दिसम्बर 2021 में हेल्पलाइन सेवा को परिवहन विभाग मुख्यालय पर शिफ्ट कर दिया गया। पहले हेल्पलाइन सेवा 24 घंटे संचालित की जा रही थी। हालांकि, वर्तमान समय में इसका संचालन सुबह 09 बजे से शाम 06 बजे तक किया जा रहा है। हेल्पलाइन सेवा में पांच कर्मचारी कार्य कर रहे हैं।
अधिक खर्च को देखते हुए किया गया शिफ्ट
परिवहन विभाग मुख्यालय से हटकर अंयत्र संचालन के दौरान हेल्पलाइन सेवा पर अधिक खर्च आ रहा था। जानकारी के मुताबिक, उस दौरान विभाग को हेल्पलाइन सेवा के संचालन के लिए हर माह करीब 08 लाख रुपए खर्च करने पड़ते थे। इसमें किराए का खर्च समेत बिजली का खर्च भी शामिल था। इसका भुगतान कार्यालय व्यय के मद से किया जा रहा है। तत्कालीन परिवहन आयुक्त धीरज साहू ने खर्च कम करने के लिए हेल्पलाइन सेवा को मुख्यालय में शिफ्ट कराया था। जिसके बाद किराए के साथ विभाग को बिजली के खर्च की भी बचत होने लगी, वहीं कम्पनी द्वारा खर्च की जाने वाली बिजली की वसूली के लिए सब मीटर भी लगाया गया। जिसके बाद हेल्पलाइन सेवा पर होने वाले खर्च का व्यय भार कुछ कम हुआ, वहीं हेल्पलाइन सेवा के खर्च को और कम करने के लिए टेंडर प्रक्रिया के जरिए सेवा प्रदाता के चयन की प्रक्रिया को अपनाया गया।
रिपोर्ट-पंकज पाण्डेय
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