Natwar Singh Passed Away, नई दिल्ली: कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह का शनिवार देर रात निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार थे। कांग्रेस नेता ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में अंतिम सांस ली। पारिवारिक सूत्रों का कहना है कि नटवर सिंह का अंतिम संस्कार दिल्ली में किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने नटवर सिंह के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया।
पीएम मोदी ने जताया दुख
पीएम नरेंद्र मोदी ने नटवर सिंह के निधन (Natwar Singh) पर इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर कर लिखा- “नटवर सिंह जी के निधन से गहरा दुख हुआ। उन्होंने कूटनीति और विदेश नीति की दुनिया में बहुत बड़ा योगदान दिया। वे अपनी बुद्धिमत्ता के साथ-साथ विपुल लेखन के लिए जाने जाते थे। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।”
वहीं, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नटवर सिंह के निधन पर दुख जताते हुए कहा, “प्रतिष्ठित राजनयिक और पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह के निधन से गहरा दुख हुआ है। उनके कई योगदानों में जुलाई 2005 के भारत-अमेरिका परमाणु समझौते में महत्वपूर्ण भूमिका शामिल है। उनके लेखन, विशेष रूप से चीन पर, ने हमारी कूटनीति में बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान की। उनके परिवार के प्रति संवेदना। ओम शांति।”
Pained by the passing away of Shri Natwar Singh Ji. He made rich contributions to the world of diplomacy and foreign policy. He was also known for his intellect as well as prolific writing. My thoughts are with his family and admirers in this hour of grief. Om Shanti. pic.twitter.com/7eIR1NHXgJ
— Narendra Modi (@narendramodi) August 11, 2024
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नटवर सिंह का राजनीतिक करियर
बता दें कि नटवर सिंह (Natwar Singh) 2004-05 में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में विदेश मंत्री के पद पर कार्यरत थे। इससे पहले वे नौकरशाह थे। 1953 में उनका चयन भारतीय विदेश सेवा के लिए हुआ था, जिससे उन्होंने 1984 में इस्तीफा दे दिया था। फिर वे कांग्रेस के टिकट पर राजस्थान के भरतपुर से चुनाव लड़े और लोकसभा सांसद बने।
1985 में उन्हें केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई और उन्हें इस्पात, कोयला और खान तथा कृषि विभाग आवंटित किए गए। 1986 में वे विदेश राज्य मंत्री बने। उन्होंने पाकिस्तान में भारत के राजदूत के रूप में भी कार्य किया। 1987 में न्यूयॉर्क में आयोजित निरस्त्रीकरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के वे अध्यक्ष चुने गए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 42वें सत्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भी किया।