नौसेना की ताकत बढ़ाएंगी ब्रह्मोस मिसाइले, रक्षा मंत्रालय ने इस समझौते पर किए हस्ताक्षर

नई दिल्ली: रक्षा मंत्रालय ने नौसेना वर्जन की सतह से सतह पर मार करने वाली 38 ब्रह्मोस मिसाइलों के लिए गुरुवार को ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड (बीएपीएल) के साथ 1,700 करोड़ रुपये के समझौते पर हस्ताक्षर किए। इन दोहरी भूमिका वाली मिसाइलों के शामिल होने से भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही इस अनुबंध से हथियार प्रणाली और गोला-बारूद के स्वदेशी उत्पादन को और बढ़ावा मिलेगा।

रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड भारत और रूस के बीच एक संयुक्त उद्यम है, जो नई पीढ़ी की सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, जिसमें भूमि के साथ-साथ जहाज-रोधी हमलों के लिए उन्नत रेंज और दोहरी भूमिका क्षमता है। रक्षा उत्पादन में ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को और प्रोत्साहन देते हुए रक्षा मंत्रालय ने ‘खरीदें-भारतीय’ श्रेणी के तहत ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के साथ यह अनुबंध किया है। यह अनुबंध स्वदेशी उद्योग की सक्रिय भागीदारी के साथ महत्वपूर्ण हथियार प्रणाली और गोला-बारूद के स्वदेशी उत्पादन को और बढ़ावा देने वाला है।

भारतीय नौसेना ने अपने युद्धपोतों की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए विस्तारित रेंज की 38 ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल अधिग्रहण करने के लिए 1,700 करोड़ रुपये का प्रस्ताव पिछले साल दिसम्बर में रक्षा मंत्रालय को दिया था। ब्रह्मोस मिसाइल समुद्री सेना के कई युद्धपोतों पर पहले से ही स्थापित है और अब यह मिसाइल युद्धपोतों का मुख्य स्ट्राइक हथियार होगा। पहले 300 किमी. तक मारक क्षमता वाली ब्रह्मोस मिसाइल में डीआरडीओ ने पीजे-10 परियोजना के तहत स्वदेशी बूस्टर लगाकर इसकी मारक क्षमता 400 किमी. तक बढ़ा दी है।

नौसेना ने पिछले साल 01 दिसम्बर को अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह क्षेत्र में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के एंटी शिप वर्जन का परीक्षण किया था। 300 किलोमीटर की स्ट्राइक रेंज वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल एंटी शिप वर्जन को भारतीय नौसेना के आईएनएस रणविजय से लॉन्च किया गया। ब्रह्मोस ने बंगाल की खाड़ी में निकोबार द्वीप समूह के पास अपने लक्ष्य जहाज को सफलतापूर्वक मार दिया। भारतीय नौसेना ने अपने युद्धपोत आईएनएस चेन्नई से भी ब्रह्मोस मिसाइल का फायरिंग परीक्षण किया था, जो उच्च समुद्र में 400 किमी. से अधिक दूरी पर लक्ष्य पर प्रहार करने की अपनी क्षमता दिखाने के लिए थी।

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