World Eye Donation Day: आपका एक कदम किसी नेत्रहीन की अंधेरी दुनिया को कर सकता है रोशन

लखनऊः हर साल 10 जून को विश्व नेत्रदान दिवस मनाया जाता है, ताकि दूसरों की अंधेरी दुनिया को रोशन करने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा सके। हमारे देश में ऐसे कई लोग हैं जो किसी दुर्घटनावश या फिर जन्मजात अंधे हैं। लेकिन इन्हें जागरुकता और कुछ प्रयासों से एक बेहतर जिंदगी दी जा सकती है। अक्सर कहा जाता है कि ‘रक्त दान महादान’ लेकिन नेत्र दान भी इससे कम नहीं है, क्योंकि इस दान से आप किसी की जिंदगी में उजाला ला सकते हैं।

एक व्यक्ति 4 लोगों को दे सकता है रोशनी

वर्तमान में एक व्यक्ति मृत्यु के पश्चात चार लोगों की अंधेरी जिंदगी में उजाला बिखेर सकता है। पहले दोनों आंखों से दो ही लोगों को कोर्निया मिल पाती थी, लेकिन नई तकनीक आने के बाद से एक आंख से दो कोर्निया प्रत्यारोपित की जा रही है। डी मेक से होने वाला यह प्रत्यारोपण देश के हर बड़े आंखों के अस्पताल में शुरु हो चुका है। इसमें खास बात यह है कि व्यक्ति के मरने के बाद उसकी पूरी आंख नहीं बदली जाती। केवल रोशनी वाली काली पुतली ही ली जाती है। व्यक्ति की मृत्यु के छह घंटे तक ही कार्निया प्रयोग में लाई जा सकती है।

बदलती लाइफस्टाइल बनी समस्या

हमारी बदलती लाइफस्टाइल, अनियमित दिनचर्या, प्रदूषण और बहुत ज्यादा स्ट्रेस की वजह से अधिकांश लोगों में आंखों जुड़ी समस्या बढ़ गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, कॉर्निया की बीमारियां (कार्निया की क्षति, जो कि आंखों की अगली परत हैं), मोतियाबिंद और ग्लूकोमा के बाद, दृष्टि हानि अंधेपन के प्रमुख वजहों में से एक हैं। ब्लड केंसर जैसी बीमारियों के कारण भी कई अभागे अपनी आंखें गवां बैठते हैं।
कौन कर सकता है नेत्रदान

चश्मा पहनने वाले, डायबिटीज़, अस्थमा, हाई ब्लड प्रेशर सहित कई अन्य बीमारियों से पीड़ित लोग भी नेत्र दान कर सकते हैं। इसके अलावा मोतियाबिंद, कालापानी या आंखों का आपरेशन करवाने वाले व्यक्ति भी आसानी से नेत्रदान कर सकते हैं। इसके लिए आप आंखों के डॉक्टर से सलाही भी ले सकते हैं।

कौन नहीं कर सकता नेत्रदान

कई सारे गंभीर रोगों से पीड़ित व्यक्ति नेत्रदान नहीं कर सकते हैं। जैसे- एड्स, हैपेटैटिस, पीलिया, ब्लड केन्सर, रेबीज (कुत्ते का काटा), सेप्टीसिमिया, गैंगरीन, ब्रेन टयूमर, आंख के आगे की काली पुतली (कार्निया) की ख़राबी हो, अथवा ज़हर आदि से मृत्यु हुई हो या इसी प्रकार के दूसरे संक्रामक रोग हों, तो इन्हें नेत्रदान की मनाही होती है।

नेत्रदान की प्रक्रिया

यह प्रक्रिया अत्यंत सरल है, और महज 15-20 मिनट में ही पूरी हो जाती है। नेत्रदान प्रक्रिया के कारण अंतिम संस्कार में किसी तरह का विलंब नहीं होता है। कोई भी व्यक्ति अपना नेत्र गुप्त रूप से दान कर सकता है, जो उसकी मृत्यु के पश्चात एक मामूली से ऑपरेशन के जरिये आंखों से कोर्निया को निकाल लिया जाता है।

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