विक्रमसिंघे बने श्रीलंका के नए प्रधानमंत्री, देश को संकट से निकालना होगी बड़ी चुनौती

कोलंबोः श्रीलंका में जारी आर्थिक व राजनीतिक गतिरोध के बीच रानिल विक्रमसिंघे (Wikramasinghe) को नया प्रधानमंत्री बनाया गया है। वे पहले भी चार बार श्रीलंका के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। श्रीलंका में भीषण आर्थिक संकट को लेकर हुए जनांदोलन ने राजनीतिक संकट भी पैदा कर दिया है। इसके बाद प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे को इस्तीफा देना पड़ा था। पूरे श्रीलंका में हुई हिंसा के बाद संकट लगातार बना हुआ है। अब चार बार देश के प्रधानमंत्री रह चुके रानिल विक्रमसिंघे को श्रीलंका का नया प्रधानमंत्री बनाया गया है। राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने उन्हें प्रधानमंत्री के तौर पर पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

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संसद में विक्रमसिंघे (Wikramasinghe) की यूनाइटेड नेशनल पार्टी के मात्र एक सांसद है। इसके बावजूद अच्छे राजनीतिक प्रशासक की छवि के कारण उन्हें संयुक्त सरकार का प्रधानमंत्री बनाया गया है। बता दें कि रानिल विक्रमसिंघे यूनाइटेड नेशनल पार्टी के चीफ हैं और उनका एक लंबा रानजीतिक करियर रहा है। ऐसे में इस मुश्किल समय में उन्हें प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी मिलना काफी मायने रखता है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री बनाए जाने से पहले रानिल विक्रमसिंघे की राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे से अकेले में एक मुलाकात हुई थी। उस मुलाकात के बाद ही उनके नाम पर मुहर लग गई थी।

गौरतलब है कि श्रीलंका में पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के इस्तीफे के बाद से भड़की हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। पूरे देश में इस समय सरकार के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन हो रहे हैं। संकट के बीच प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले महिंदा राजपक्षे अपने करीबियों पर हमले के मद्देनजर एक नौसेना अड्डे पर सुरक्षा घेरे में हैं। इस बीच श्रीलंका की एक अदालत ने महिंदा राजपक्षे और उनकी पार्टी के 12 अन्य नेताओं के देश छोड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

विक्रमसिंघे के कंधों पर होगा चुनौतियों का पहाड़

उल्लेखनीय है कि श्रीलंका इस समय सबसे खराब दौर से गुजर रहा है, रानिल विक्रमसिंघे को फिर पीएम बना बड़ा दांव चला गया है। उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं। सबसे बड़ी तो कर्ज तले डूबती अर्थव्यवस्था को बचाना है। इस वक्त श्रीलंका भारी कर्ज में चल रहा है, हालात इतने खराब हैं कि कर्ज चुकाने के लिए भी कर्जा लेने की नौबत आ गई है। ऐसे में इस स्थिति से श्रीलंका को निकालना बड़ी चुनौती होगी।

इसके साथ आर्थिक संकट से श्रीलंका में बड़े स्तर पर हिंसा देखने को मिली है। ऐसे में कानून व्यवस्था को फिर दुरुस्त करना भी उनके के लिए बड़ी चुनौती होगी। वहीं इस समय श्रीलंका में महंगाई भी सारे रिकॉर्ड तोड़ रही है, जरूरी वस्तुओं की भारी कमी देखने को मिल रही है। ऐसे में इस क्षेत्र में भी जनता को तुरंत राहत की जरूरत है। विक्रमसिंघे ये सब कैसे करते हैं, ये तो आने वाला समय ही बताएगा।

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