मुलाकातों के पीछे का राज

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भाजपा- शिवसेना के बीच के रिश्ते इस वक्त बहुत खराब चल रहे हैं। उन रिश्तों में फिर पहले जैसी निकटता लाने के प्रयास के तौर पर 7 जनवरी को जब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शिवसेना के वरिष्ठ नेता तथा पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मनोहर जोशी तथा राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मुलाकात की तो उसके अलग-अलग मायने निकाले गए। किसी ने इन मुलाकातों को औरंगाबाद नामांतरण के चश्मे से देखा तो किसी ने इन मुलकातों को दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन को बीच का रास्ता निकालने के लिए की गई कोशिश के रूप में देखा तो किसी ने राज्य में फिर से भाजपा-शिवसेना की सरकार की स्थापना की संभावनाओं को तलाशा।

नितिन गडकरी भाजपा के लिए संकट मोचक के रूप में ही अक्सर सामने आते रहे हैं। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मनोहर जोशी के निवास पर जाकर उनसे मुलाकात की। मनोहर जोशी-नितिन गडकरी के बीच यह मुलाकात उस वक्त हुई है, जब औरंगाबाद नामामंतरण के मुद्दे को लेकर शिवसेना- कांग्रेस के बीच जबर्दस्त तनातनी चल रही है। राज्य की महाविकास आघाडी सरकार में शामिल तीन दलों में से दो यानि शिवसेना-कांग्रेस के बीच औरंगाबाद नामांतरण के मुद्दे को लेकर जिस तरह की नूराकुश्ती शिवसेना-कांग्रेस नेताओं के बीच जारी है, उससे राज्य का राजनीतिक माहौल बहुत ज्यादा खराब हो रहा है। कहा जा रहा है कि अगर शिवसेना नामांतरण पर अड़ी रही तो कांग्रेस सरकार से बाहर होने का निर्णय भी ले सकती है।

हालांकि, अभी इस बात के संकेत नहीं मिले हैं कि कांग्रेस सरकार से बाहर जा सकती है, फिर भी एक तैयारी के मकसद से गडकरी की मनोहर जोशी तथा राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से की मुलाकात को खासा महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। भाजपा-शिवसेना गठबंधन अब इतिहास की बात हो गई है, अब उसके स्थान पर शिवसेना-राकांपा तथा कांग्रेस का एकत्रीकरण करके महाविकास आघाडी का निर्माण किया गया है। राज्य में सामने आए इस नएराजनीतिक समीकरण के  बाद तो सरकार में शामिल तीनों पार्टियों के नेता लगातार यही कहते रहे हैं कि सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी। हालांकि अभी सरकार अपने कार्यकाल के दूसरे वर्ष में प्रविष्ट हुई है। अब तक के कार्यकाल में बतौर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का कामकाज औसत ही रहा है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री तथा वर्तमान में विधानसभा में विरोधी पक्ष नेता देवेंद्र फडणवीस तथा वर्तमान मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बीच मतभेद इतने बढ़ गए हैं कि उनके बीच अब राज्य में फिर से भाजपा-शिवसेना गठबंधनकी सरकार स्थापित होने की दूर-दूर तक कोई संभावना नज़र नहीं आ रही है।

क्या नितिन गडकरी ने राज्य में किसी नए प्रस्ताव पर चर्चा के मद्देनज़र मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मुलाकात की है। नितिन गडकरी तथा देवेंद्र फडणवीस के बीच भले ही बहुत अच्छे राजनीतिक संबंध हों, लेकिन विगत दिनों हुए स्नातक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव के मद्देनज़र नागपुर स्नातक निर्वाचनक्षेत्र के चुनाव के दौरान जिस तरह से गडकरी तथा फडणवीस समर्थकों में दूरी बढ़ी, उसके कारण नागपुर स्नातक क्षेत्र की सीट भाजपा को गंवानी पड़ी, शायद इसीलिए नई संभावनाओं के तहत नितिन गडकरी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मिलने गए हों। राज्य की विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा करने के लिए सरकारी अतिथि गृहसह्याद्री पर मुख्यमंत्री तथा उप मुख्यमंत्री अजित पवार की उपस्थिति में एक महत्त्वपूर्ण बैठक भी 7 जनवरी को आयोजित की गई थी।

इस बैठक के मद्देनज़र मुंबई में आए नितिन गडकरी सुबह शिवसेना से वरिष्ठ नेता मनोहर जोशी के घर पहुंचे और उनको पैर छूकर प्रणाम किया। नितिन गडकरी ने जिस आत्मीयता के साथ मनोहर जोशी से मुलाकात की, उतनी आत्मीयता तो स्वयं मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी मनोहर जोशी से प्रति नहीं रखते। मनोहर जोशीका शिवसेना में अब नहीं के बराबर सम्मान रह गया है, ऐसे में नितिन गडकरीकी मनोहर जोशी से की गई मुलाकात के पीछे का सच क्या है, इसकी ठीक-ठीक जानकारी नहीं मिल पायी है। सुबह ही मनोहर जोशी के निवास स्थान पहुंचे नितिन गडकरी ने छूकर उन्हें प्रणाम किया  और तबियत के बारे में उनसे बातचीत की। संभव है कि इस मुलाकात के दौरान भाजपा- शिवसेना के बीच के मधुर संबंधों पर भी चर्चा हुई होगी। केंद्र की मोदी सरकार में पहली की तुलना में भले ही नितिन गडकरी का वजन कम हो गया हो, पर महाराष्ट्र की राजनीति में नितिन गडकरी का अपना एक अलग ही महत्व है। जिस तरह राकांपा सुप्रिमो शरद पवार के शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे तथा उनसे परिवार से अच्छेसंबंध हैं, उसी तरह के संबंध भाजपा नेता नितिन गडकरी के भी है।भाजपा-शिवसेना के गठबंधन के दौर के प्रमुख नेताओं में प्रमोद महाजन, गोपीनाथ मुंडे की तरह नितिन गडकरी का भी अपना विशेष महत्व रहा है।

गठबंधन के दौर की राजनीति में नितिन गडकरी तथा मनोहर जोशी के बीच भी बहुत अच्छे संबंध थे। मनोहर जोशी की पत्नी का पिछले वर्ष निधन हुआ था, उसके बाद से मनोहर जोशी स्वयं को बहुत अकेला महसूस करने लगे थे। मनोहर जोशी-नितिन गडकरी की मुलाकात के बाद भाजपा शिवसेना के बीच पड़ी दरार की भले ही कम नहो, लेकिन इस मुलाकात ने राज्य की भगवाई राजनीति की मधुरता का उदाहरण जरूर पेश कर दिया है।1995 में महाराष्ट्र में पहली बार शिवसेना-भाजपा गठबंधन की सरकार बनी थी।मनोहर जोशी ने उस सरकार का नेतृत्व किया था, इस लिहाज से मनोहर जोशी राज्य में भगवाई सरकार तथा शिवसेना के पहले मुख्यमंत्री कहलाए। मनोहर जोशी के नेतृत्व में बनी सरकार में नितिन गडकरी सार्वजनिक निर्माण कार्यमंत्री थे। इसी कालावधि में मुंबई में 55 हाई वे के अलावा मुंबई-पुणेएक्स्प्रेस वे का निर्माण किया गया था। राज्य में किए गए उल्लेखनीय विकास कार्यों का जब-जब उल्लेख किया जाता है, तब-तब नितिन गडकरी के सार्वजनिक निर्माण कार्य मंत्री रहते समय किए गए कार्यों की सराहना की जाती है।शिवसेना-भाजपा गठबंधन की सरकार का कार्यकाल समाप्त होने के बाद मनोहरजोशी बहुत वर्षों तक सांसद थे। मनोहर जोशी ने लोकसभा अध्यक्ष पद का कामकाज बहुत ही अच्छी तरह से देखा। मनोहर जोशी भले ही आज राजनीति मेंसक्रीय नहीं हैं, लेकिन उनका राजनीतिक अनुभव बहुत कुछ सिखाता है।

मनोहर जोशी के मंत्रिमंडल में काम करने के बाद राष्ट्रीय राजनीति में सक्रियनितिन गडकरी वर्तमान में केंद्र की मोदी सरकार में केबिनेट मंत्री हैं।अपने व्यस्त कार्यक्रमों के बीच जब भी नितिन गडकरी दिल्ली से मुंबई आते हैं तो वे शिवसेना-भाजपा गठबंधन के दौर के अपने मित्रों से मिलते हैं। नितिन गडकरी ने अभी- भी अपने पुराने मित्रों का साथ नहीं छोड़ा है। नितिन गडकरी राज्य के एक ऐसे नेता हैं, जिनके भाजपा नेताओं की तरह ही शिवसेना,कांग्रेस, राकांपा सभी से स्नेहपूर्ण संबंध हैं, इसीलिए नितिन गडकरी जबभी दिल्ली से मुंबई आते हैं, तब वे अपने पुराने मित्रों से मिलते हैं। नितिन गडकरी अपने गृहनगर नागपुर में तो कई बार स्कूटर चलाते हुए भी देखेजा चुके हैं। केंद्रीय मंत्री रहते हुए कई बार नितिन गडकरी ने अपने गृहनगर नागपुर में स्कूटर चलाकर यह दर्शाया है कि मैं भी अन्य लोगों कीतरह आम नागरिक हूं। पिछले कई दिनों से कांजूर मार्ग मेट्रो कारशेड, राज्यपाल नियुक्त विधायक,औरंगाबाद नामांतरण जैसे कई विषयों को लेकर शिवसेना-भाजपा के बीच जोरदार आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।

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दोनों राजनीतिक दलों के नेता एक दूसरे पर हमला बोल रहे हैं, ऐसे हालातों में नितिन गडकरी ने एक ही दिन राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर जोशी तथा वर्तमान मुख्यमंत्री तथा शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात करके सभी को चौंका दिया। मनोहर जोशी 1995 से1999 तक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे हैं।उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष जब राकांपा सुप्रिमो शरद पवार ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे तथा राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना प्रवक्ता संजय राऊत से मुलाकात की थी, उस समय भी यह कयास लगाए जा रहे थे कि राज्य में राजनीतिक भूचाल आ सकता है। वैसे राज्य के वर्तमान उपमुख्यमंत्री अजित पवार तथा राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अगर कहीं एक साथ दिख गए तो सरकार में शामिल तीनों दलों शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस के नेताओं के दिलों की धड़कनें बढ़ जाती हैं, उन्हें महाविकास आघाडी सरकार के गठन से पहले मुख्यमंत्री के रूप में देवेंद्र फडणवीस तथाउप मुख्यमंत्री के रूप में अजित पवार द्वारा राजभवन में तड़के लिए गए शपथ ग्रहण के दृश्य दिखायी देने लगते हैं।

अगर कुछ दशक पहले की बात करें तो जब भी शरद पवार शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे से मिलते थे तो राज्य में किसी राजनीतिक भूचाल की आहट सुनाई पड़ती थी, वहीं स्थिति वर्तमान में राकांपा नेता अजित पवार तथा भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस को लेकर है, ये दोनों नेता जब भी एक मंच पर आते हैं, खलबली मच जाती है, लेकिन नितिन गडकरी की एक ही दिन राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर जोशी तथा वर्तमान मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से की गई मुलाकात ने राज्य के राजनीतिक दलों के साथ-साथ दिल्ली के विपक्षी नेताओं के सामने यह सवाल जरूर खड़ा किया होगा कि नितिन गडकरी की शिवसेना के दो वरिष्ठ नेताओं का एक ही दिन किए गए मिलाप का आखिर राज क्या है? आने वाले दिनों में हालांकि नितिन गडकरी की इस बहुचर्चित मुलाकात के पीछे का राज सामने आ ही जाएगा, लेकिन इतना तो तयहै कि नितिन गडकरी की इस मुलाकात का राजनीतिक अर्थ बहुत गहरा है, जो इसे समझेगा, वहीं राज्य तथा केंद्र की राजनीति में नितिन गडकरी की भूमिका क्या है, इसे भी अच्छी तरह समझने में कामयाब होगा। बहरहाल, शिवसेना-भाजपा केबीच बढ़ी तल्खी को कम करने में सेतु के रूप सामने आए नितिन गडकरी दोनोंराजनीतिक दलों के राजनीतिक रिश्तों में आई खटास को कम करने में किस हद तक सफल हो पाते हैं, अब सभी की निगाहें इसी ओर लगी हुई हैं।

सुधीर जोशी, महाराष्ट्र