जेएनयू में पीएचडी एंट्रेंस एग्जाम से सम्बंधित समस्याओं से छात्र परेशान

नई दिल्लीः अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विश्व का सबसे बड़ा छात्र संगठन है जो हमेशा छात्रहितों के लिए अग्रणी पंक्ति में खड़ा रहता हैं। विगत कुछ दिनों में जेएनयू में पीएचडी प्रवेश परीक्षा से सम्बंधित समस्याओं से विद्यार्थी परेशान थे। अखिल भारतीय विधार्थी परिषद ने छात्र समुदाय के लिए निम्न मुद्दों को उठाया है। इसमें जेआरएफ के माध्यम से पीएचडी के लिए आवेदन विंडो को दोबारा खोला जाए, नेट-योग्य उम्मीदवारों को जेआरएफ के माध्यम से प्रवेश के लिए आवेदन करने की अनुमति दी जानी चाहिए, एक ही दिन दो पेपर वाले छात्रों के लिए एक ही परीक्षा केंद्र की मांग, जेआरएफ के माध्यम से पीएचडी के लिए वाइवा-वॉयस की सीमा को हटा देना चाहिए, जो अब 30 प्रतिशत है और वायवा वास प्रतिशत अनुपात को 30 प्रतिशत से 10 प्रतिशत किया जाए।

वहीं 15 नवम्बर को इन्ही मांगों के साथ, अभाविप जेएनयू के डायरेक्टर ऑफ एडमिशन का पुतला दहन किया। जिसके फलस्वरूप अब जेएनयू का पीएचडी पोर्टल दोबारा खुल चुका है। अभाविप जेएनयू के इकाई अध्यक्ष रोहित ने कहा कि संघर्ष से समाधान अभाविप जेएनयू हमेशा विद्यार्थीयों के साथ है। वर्तमान समय में पूरे जेएनयू परिसर में अगर कोई एक छात्र संगठन है।

छात्रों के मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाते हैं तो एबीवीपी ही हैं। आज के हमारे धरना प्रदर्शन में हमें आम छात्रों का सहयोग जिस तरह से मिला है, उससे ये साफ देखने को मिल रहा है कि जेएनयू के छात्रों को भी अब ये बात साफ हो गई है कि कौन सा छात्र संगठन उनके साथ है और कौन उनके बेहतरी के लिए कैम्पस में प्रयतरत्न हैं।

वहीं संगठन मंत्री उमेश चंद्र अजमीरा ने कहा कि हमारी ये मांग काफी समय से चल रही है की वायवा को सत प्रतिशत से हटाया जाए। आज हमारी धरना का ये नतीजा हुआ है कि जेएनयू प्रशासन ने जेआरएफ के माध्यम से पीएचडी के लिए आवेदन विंडो को दोबारा खोला है। एबीवीपी आगे भी जेएनयू कैम्पस के बेहतरी के लिए ऐसे तमाम मुद्दे उठाती रहेगी जो छात्र हित में हो।

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