सिंगल यूज प्लास्टिक सिर्फ कागजों में बैन, प्रशासन मौन

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International Plastic Bag Free Day, नई दिल्लीः देशभर में सिंगल यूज प्लास्टिक (SUP) के इस्तेमाल पर लगे प्रतिबंध को भले ही दो साल हो गए हो, लेकिन इस पर पूरी तरह से रोक अब तक नहीं लग पाई है। आलम यह है सभी जगह एसयूपी (सिंगल यूज) उत्पाद न केवल उपलब्ध हैं, बल्कि इनका इस्तेमाल भी धड़ल्ले से जारी है। बैन (Single Use Plastic) की हुई प्लास्टिक थैलियों का उपयोग शासन के आदेश की धज्जियां उड़ा रहा हैं।

चाय, मोमोज, चाऊमीन और समोसे वाली चटनी भी प्रतिबंधित प्लास्टिक (Single Use Plastic) में ही पैक होकर मिल रही है। दुकानदार, सब्जी वाले, ठेला वाले आदि सभी शासन द्वारा बैन की हुई प्लास्टिक थैलियों का खुलेआम इस्तेमाल कर रहे हैं। जबकि जिम्मेदार जान-बूझकर चुप्पी साधे हुए हैं। शासन द्वारा कम माइक्रोन की प्लास्टिक थैलियों पर पूर्णतया बैन लगाया गया है।

प्लास्टिक थैलियों से प्रदूषण सहित नाली, गटर जाम होने की समस्या उत्पन्न होती है। यदि आप कभी मानसून के मौसम में सफाई कर्मचारियों को नालियों से मलबा हटाते हुए देखें, तो आप समझ जाएंगे कि उसमें से अधिकांश प्रतिबंधित प्लास्टिक ही होती है। जबकि शिकायतों के बावजूद इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। बाजार में सिंगल यूज वाले प्लास्टिक उत्पादों के बेहतर और सस्ते विकल्प उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों ने इनका उपयोग बंद नहीं किया है।

करीब डेढ़ दर्जन से ज्यादा चीजों पर पाबंदी

बता दें कि भारत सरकार ने 01 जुलाई, 2022 से सिंगल यूज़ या एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक (Single Use Plastic) पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस प्रतिबंध के तहत पॉलीस्टायरीन और विस्तारित पॉलिस्ट्रीन जैसे प्लास्टिक का निर्माण, आयात, भंडारण, वितरण, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक है। प्रतिबंध के तहत सिंगल यूज प्लास्टिक से बनी करीब डेढ़ दर्जन से ज्यादा चीजों पर पाबंदी लगाई गई है। एक पदार्थ के रूप में प्लास्टिक गैर-बायोडिग्रेडेबल है और इस प्रकार प्लास्टिक की थैलियां सैकड़ों वर्षों तक पर्यावरण में रहती हैं और इसे अत्यधिक प्रदूषित करती हैं। इससे पहले कि प्लास्टिक थैलियां हमारी धरती को पूरी तरह बर्बाद कर दें, उनके इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाना जरूरी हो गया है।

इन सिंगल यूज प्लास्टिक की वस्तुओं पर लगा प्रतिबंध

प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम के तहत सिंगल यूज प्लास्टिक की कुल 19 वस्तुओं पर यह प्रतिबंध लगाया गया है। इनमें थर्माकोल से बनी प्लेट, कप, गिलास, कटलरी जैसे- कांटे चम्मच, चाकू, पुआल, ट्रे, मिठाई के बक्सों पर लपेटी जाने वाली फिल्म, निमंत्रण कार्ड, सिगरेट पैकेट की फिल्म, प्लास्टिक के झंडे, गुब्बारे की छड़ें और आइसक्रीम पर लगने वाली स्टिक, क्रीम, कैंडी स्टिक और 100 माइक्रोन से कम के बैनर शामिल हैं।

75 माइक्रॉन से कम पॉलीथीन बैग पर प्रतिबंध

भारत सरकार ने सितंबर 2021 में पहले ही 75 माइक्रॉन से कम के पॉलीथीन बैग पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसमें पहले के 50 माइक्रॉन की सीमा को बढ़ा दिया गया था। 2022 में सिंगल यूज प्लास्टिक को पूरी तरह से समाप्त करने के भारत के प्रयासों के तहत 31 दिसंबर, 2022 तक प्लास्टिक कैरी बैग की न्यूनतम मोटाई को मौजूदा 75 माइक्रॉन से 120 माइक्राॉन में बदलने के आदेश हैं। सरकार की तरफ से प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। अधिकारियों की टीम को प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक वस्तुओं के अवैध उत्पादन, आयात, वितरण, बिक्री रोकने का काम सौंपा गया है। फिर भी यह सारे प्रयास निष्फल साबित हो रहे हैं।

बता दें कि देश में सालाना 2.4 लाख टन प्लास्टिक का उत्पादन होता है जबकि 18 ग्राम प्रति व्यक्ति खपत है। दूसरी तरफ वैश्विक स्तर पर यह खपत 28 ग्राम प्रति व्यक्ति है। भारत में 60 हजार करोड़ रुपए का प्लास्टिक उद्योग है। इसके निर्माण में 88 हजार इकाइयां लगी हैं जबकि प्लास्टिक उद्योग से 10 लाख लोग जुड़े हैं। सालाना एक्सपोर्ट 25 हजार करोड़ रुपये लगभग है। कम माइक्रॉन की प्लास्टिक थैलियों में खाद्य पदार्थ लेने से रासायनिक संक्रमण होने से शरीर में घातक बीमारियां पैदा होती हैं। हालांकि कहने को तो प्रतिबंधित प्लास्टिक थैली की बिक्री और उपयोग की रोकथाम के लिए कमेटी बनाई गई है, बावजूद प्लास्टिक थैलियों का उपयोग धड़ल्ले से बाजारों में देखा जा रहा है।

यूपी में प्रतिबंध का नहीं दिख रहा असर

उत्तर प्रदेश भारत में सबसे अधिक जिले वाला राज्य है। यहां प्रतिबंधित पॉलीथीन बैग का उपयोग जबर्दस्त तरीके से हो रहा है। जहां तक उत्तर प्रदेश की बात है तो यहां जुलाई 2018 में तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक ने योगी सरकार के अध्यादेश को मंजूरी प्रदान की थी। जिसमें 50 माइक्रॉन से पतली प्लास्टिक (पॉलीथीन बैग) पर प्रतिबंध लगाया गया था।

यूपी में शुरुआत में तो प्रतिबंधित प्लास्टिक के इस्तेमाल पर सख्त प्रावधान किए गए थे। यहां तक प्रतिबंधित प्लास्टिक बैग बेचने, रखने और भंडारण का भी दोषी पाए जाने पर छह महीने की कारावास से लेकर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान भी किया गया था। बावजूद इसके प्रतिबंधित पॉलीथीन बैग का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है।

दरअसल, बाजार में सिंगल यूज वाले प्लास्टिक उत्पादों पर रोक नहीं लग पाने का कारण विकल्पों का न बना है जब हमें बाजार में सिंगल यूज प्लास्टिक के बेहतर विकल्प मिलेंगे तो हम स्वत: उनका इस्तेमाल करेंगे और सिंगल यूज प्लास्टिक की मांग और खपत कम हो जाएगी। बाजार में सिंगल यूज पॉलीथीन के सस्ते और टिकाऊ विकल्पों के निर्माण और उपयोग को बढ़ावा देने और लोगों को जागरूक करने की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन और सरकार को उठानी होगी। सरकार और जनता के सहयोग से ही सिंगल यूज वाले प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगाई जा सकती है।

सख्त कार्रवाई करने की जरुरत

इसके अलावा जिम्मेदार अधिकारियों को छोटे-मोटे दुकानदारों और ठेले वालों पर कार्रवाई करने की बजाए सिंगल यूज प्लास्टिक बनाने वाली कंपनियों और कारखानों को बंद करवाना होगा। इन कारखानों के मालिकों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाने होंगे। पॉलीथीन और प्लास्टिक बैन (Single Use Plastic) के नाम पर दिखावे के लिए दुकानदारों और इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कागजी कार्रवाई करने से कुछ नहीं होगा। इसके लिए व्यापक स्तर पर लगातार और लंबे समय तक अभियान चलाकर कार्रवाई करने की जरूरत है।

सिंगल यूज वाली प्लास्टिक के खतरनाक प्रभाव

प्लास्टिक बैग, स्ट्रॉ, बोतलें और पैकेजिंग जैसी सिंगल यूज वाली प्लास्टिक की वस्तुएं गंदगी और प्रदूषण का कारण बनती हैं। इनमें से ज़्यादातर को ठीक से रीसाइकिल नहीं किया जाता। ये गली मोहल्लों में नालियों को जाम कर देते हैं। इन्हें खाकर गौवंश व अन्य पशुओं को कई तरह की समस्याएं हो जाती हैं। प्लास्टिक की वजह से जल निकायों में भी प्रदूषण फैलता है।

  • फेंके गए सिंगल यूज वाली प्लास्टिक सड़कों पर फैल जाते हैं। धार्मिक स्थलों, पर्यटन स्थलों, ऐतिहासिक स्थलों और खेतों-खलिहानों में पर्यटकों के द्वारा गंदगी फैला दी जाती है, जो नुकसानदायक होने के साथ ही सौंदर्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
  • प्लास्टिक आसानी से बायोडिग्रेड नहीं होता, इसलिए सिंगल यूज वाली वस्तुओं से उत्पन्न कूड़ा-कचरा सैकड़ों सालों तक बना रह सकता है, जिसके कारण पर्यावरण दूषित होता है।
  • प्लास्टिक के छोटे-छोटे कण भोजन, पीने के पानी व अन्य माध्यमों से शरीर के अंदर पहुंच जाते हैं, जो कई तरह के गंभीर रोगों और बीमारियों का कारण बनते हैं।
  • खुले में पड़े डिस्पोजेबल, प्लास्टिक बैग आदि गाय, भैंस और अन्य ऐसे पशुओं द्वारा निगल लिए जाने पर खतरनाक हो जाते हैं।
  • प्लास्टिक बैग, बोतलें और पैकेजिंग जैसी सिंगल यूज वाली प्लास्टिक वस्तुएं जलाने से वायुप्रदूषण का खतरा बढ़ता है। सांस संबंधी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के लिए जानलेवा हो सकता है।

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