शिवलहरा गुफाएंः जहां पाण्डवों ने काटा था अपने अज्ञातवास का समय

अनूपपुरः विश्व विरासत सप्ताह 19 से 25 नवम्बर के बीच हर साल पूरी दुनिया मे मनाया जाता है। अनूपपुर जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर जनपद पंचायत अनूपपुर के ग्राम पंचायत दारसागर के समीप एएसआई द्वारा संरक्षित शिवलहरा गुफाओं का क्लेक्टर सोनिया मीना द्वारा इंगाराजविवि के डीन और पुरातत्व संकाय के प्रमुख आलोक श्रोतीय, प्रोफेसर मोहन चढार, विजय नाथ मिश्रा, राजनगर महाविद्यालय के प्रोफेसर हीरा सिंह के साथ गुरुवार को भ्रमण कर ऐतहासिक और पुरातात्विक सांस्कृतिक महत्व की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान एसडीएम मायाराम कोल, नायब तहसीलदार दीपक तिवारी और ग्राम स्तरीय शासकीय कर्मचारियों के साथ ग्रामवासी उपस्थित रहे।

केवई नदी के बहती धाराओं के ऊपर खूबसूरती और प्राकृतिक मनोरम दृश्योंग को समेटे शिवलहरा एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है। यहां प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर मेले का आयोजन किया जाता है। जिसमें दूरदराज के हजारों ग्रामीण पूजा-अर्चना के साथ मेले का भी आनंद लेते हैं। शिवलहरा धाम लोगों की श्रृद्धा और आस्था का केन्द्र बना हुआ है। जहां भगवान शिव की आराधना की जाती है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शिवलहरा की गुफाओं में पाण्डवों ने अपने अज्ञात वास का समय व्यतीत किया था। यहां 5 गुफाएं बनी हुई हैं। जिसमें पांचों भाईयों के नाम का शिवलहरा गुफाओं में पुरातत्व भाषा ब्रम्ही और शंख लिपि में लेख है। कलेक्टर ने शिवलहरा गुफाओं का भ्रमण कर गुफा के पुरातात्विक इतिहास आदि की जानकारी प्राप्त करते हुए शिवलहरा की गुफाओं के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति व पुरातत्व के संरक्षण तथा पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के संबंध में चर्चा की। उन्होंने स्थानीय शासकीय अमले तथा ग्रामवासियों को शिवलहरा के पुरातात्विक इतिहास व इसके महत्व की जानकारी देकर यहां आने वाले लोगों को जागरूक करने के सम्बंध में जिला पुरातत्व एवं पर्यटन संस्कृति परिषद अनूपपुर के माध्यम से कार्यशाला आयोजित करने के निर्देश दिये।

इस सम्बंध में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय अमरकंटक के पुरातत्व संकाय के प्रमुख आलोक श्रोतीय ने बताया कि गुफाओं में अंकित ब्राह्मी लिपि के अभिलेखों से इन गुफाओं का निर्माण प्रथम शताब्दी ईस्वी में हुआ ज्ञात होता है। गुफाओं में अंकित अभिलेख ब्राह्मी तथा शंख लिपि में लिखे हुए हैं। प्रोफ़ेसर आलोक श्रोत्रिय ने इन गुफाओं के प्रलेखीकरण का कार्य किया है। उन्होंने पूर्व के पाठों के साथ तुलना कर यहां अंकित सभी ब्राह्मी अभिलेखों का पाठ भी प्रस्तुत किया है। इन लेखों से ज्ञात होता है कि स्वामीदत्त के राज्य काल में मूलदेव नाम के व्यक्ति द्वारा इन गुफाओं का निर्माण कराया गया। गुफाओं में साधुओं के रहने तथा ध्यान करने हेतु बने कक्ष भी हैं। साथ ही हाथी पर सवार व्यक्तियों और छत्र-युक्त राज- कर्मचारियों का अंकन भी इन गुफाओं में मिलता है। यक्ष के समान विशाल आकृतियों भी इन गुफाओं में बनी हुई है। पुरातात्विक दृष्टि से यह गुफाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और राष्ट्रीय स्तर के स्मारक के रूप में इनका उल्लेख मिलता है।

अनूपपुर जिले में अति महत्वपूर्ण ब्राह्मी अभिलेखों का मिलना और प्रथम शताब्दी ईस्वी तक की इन गुफाओं की निर्मिती ऐतिहासिक दृष्टि से जिले की विशिष्ट धरोहर है। गुफाओं के आसपास के क्षेत्र में ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक अवशेषों को सामने लाने के लिए विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति तथा पुरातत्व विभाग द्वारा 2015 में गुफाओं के समीप दारसागर के गम्भीरवा टोला में उत्खनन करा कर आरम्भिक ऐतिहासिक काल के अत्यंत महत्वपूर्ण पुराअवशेष प्रकाश में लाए गये है।

विश्व विरासत सप्ताह के अंतर्गत धरहरकला में होगी कार्यशाला

हर साल 19 से 25 नवम्बर तक दुनिया भर में विश्व विरासत सप्ताह मनाया जाता है। इसका उद्देश्यक विरासत के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना और संरक्षण व संवर्धन को प्रोत्साहित करना है। इसी उद्देश्य के तहत जिला पुरातत्व एवं पर्यटन संस्कृति परिषद अनूपपुर द्वारा इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वसविद्यालय अमरकंटक के प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति तथा पुरातत्व विभाग के सहयोग से पुष्पराजगढ़ विकासखण्ड के ग्राम धरहरकला के श्रीगणेश आश्रम में 24 नवम्बर 2022 को प्रातः10 बजे से कार्यशाला कर विद्यार्थियों तथा ग्रामीणजनों को पुरातात्विक इतिहास व प्राचीन धरोहर के महत्व के संबंध में जनजागरूकता की जा रहीं।

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