रक्षाबंधन पर छाया भद्रा का साया, संशय के बीच जानें कब राखी बांधना होगा शुभ

कासगंजः रक्षाबंधन पर बहन भाई को तिलक लगाकर आरती उतारती है और कलाई पर राखी बांधती है। इस दिन मुहूर्त का भी बड़ा महत्व है। बहनों को अच्छा मुहूर्त देखकर ही भाई कराई पर राखी बांधनी चाहिए। इस साल रक्षाबंधन पर भद्रा का संकट मंडरा रहा है। भद्रा काल को शास्त्रों में अशुभ माना गया है। इसमें राखी बांधने या कोई शुभ कार्य के परिणाम अच्छे नहीं होते। भद्रा सूर्यदेव की पुत्री और शनिदेव की बहन हैं और वह शनि की भांति स्वभाव में भी क्रूर है। इस काल के चलते शुक्रवार 12 अगस्त को भी रक्षाबंधन का पर्व मनाना अनुकूल होगा। धर्म शास्त्र के अनुसार वैसे तो भद्रा का शाब्दिक अर्थ कल्याण करने वाला है, लेकिन इसके विपरित भद्रा काल में शुभ कार्य वर्जित होते हैं।

कब लग रहा भद्रा काल
भद्रा राशियों के अनुसार तीनों लोको में भ्रमण करती है। मृत्युलोक (पृथ्वीलोक) में इसके होने से शुभ कार्य में विघ्न आते हैं। 11 अगस्त को सूर्योदय प्रातः 5 बजकर 30 मिनट में हो रहा है। इस दिन पूर्णिमा दिन में 9 बजकर 35 मिनट पर है, लेकिन उसी समय यानि 9.35 पर पूर्णिमा के साथ भद्रा का भी प्रारंभ हो रहा है। अगर तिथियों का अवलोकन किया जाए तो एकादशी, त्रयोदशी और पूर्णमासी आदि तिथि पर भद्रा रहती ही है।

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भद्रा के बारे में खास जानकारी
भद्रा के विषय में एक खास बात है जिसके बारे में लोगों के पास जानकारी नहीं है कि भद्रा का वर्णन वास्तु शास्त्र में किया गया है। कुंभ, मीन, कर्क और सिंह में चंद्रमा हो तो भद्रा का वास मृत्यु लोक यानी पृथ्वी पर माना जाता है। इसके अलावा मेष, वृष, मिथुन, वृश्चिक में चंद्रमा होने पर भद्रा का वास स्वर्ग लोक में होता है। वहीं, कन्या, तुला और धनु में चंद्रमा होने पर भद्रा का वास पाताल लोक में माना जाता है ऐसे में भद्रा अगर पाताल लोक में हो या स्वर्ग लोक में यह काफी शुभ फलदायी माना जाता है। ऐसे में 11 अगस्त 2022 को भद्रा पाताल लोक में है जिसके चलते आप बिना किसी दिक्कत के 11 अगस्त को रक्षा बंधन का त्योहार मना सकते हैं और सुबह 10 बजकर 37 मिनट के बाद भाइयों को रक्षा सूत्र बांध सकते हैं। भद्रा के पाताल लोक में होने के कारण वह आपको किसी भी तरह का कष्ट नहीं देगी।

भद्रा का रक्षाबंधन से गहरा नाता
भद्रा का रक्षाबंधन से बहुत गहरा नाता है, पौराणिक कथा के अनुसार भद्रा काल में लंका नरेश रावण की बहन ने उसे राखी बांधी थी। इसके बाद रावण को इसका अशुभ परिणाम भुगतना पड़ा था, रावण की लंका का नाश हो गया था। रक्षाबंधन के लिए प्रदोष काल का मुहूर्त 11 अगस्त 2022 रात 08.52 से 09.14 तक है और 12 अगस्त की सुबह 5.30 से 7.17 बजे तक है, यदि फिर भी आपके मन में भद्रा को लेकर संशय है तो आप इस मुहूर्त में रक्षाबंधन मना सकते हैं।

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