Rupee vs Dollar: डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, पिछले 6 महीने में सबसे बड़ी गिरावट

डॉलर

नई दिल्लीः अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने के फैसले का प्रतिकूल असर भारतीय मुद्रा रुपये (Rupee) पर भी पड़ा है। फेडरल रिजर्व के फैसले के बाद आज रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड लो लेवल पर पहुंचता हुआ नजर आया। डॉलर इंडेक्स की मजबूती के कारण भारतीय मुद्रा ने आज प्रति डॉलर 80.67 रुपये के रिकॉर्ड लो स्तर को टच कर लिया। डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में पिछले 6 महीने में आज इंट्रा-डे के कारोबार के दौरान सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। आशंका जताई जा रही है कि अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था में जल्दी ही सुधार आने के संकेत नहीं मिले तो रुपये की गिरावट 81 रुपये के स्तर को भी पार सकती है।

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इंटर बैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में डॉलर के मुकाबले रुपया आज 31 पैसे की कमजोरी के साथ 80.29 के स्तर पर खुला। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंका ने आज पूरी दुनिया के मुद्रा बाजार में भूचाल की स्थिति बना रखी है। फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी करके अमेरिकी अर्थव्यवस्था में कमजोरी आने की आशंका को और बढ़ा दिया है। इसी वजह से घरेलू शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की जोरदार बिकवाली के कारण आज मुद्रा बाजार में कारोबार की शुरुआत से ही डॉलर की मांग तेज बनी हुई थी।

डॉलर के मुकाबले 80.67 पर पहुंचा

मुद्रा बाजार का काम शुरू होने के बाद आज जैसे जैसे दिन का कारोबार आगे बढ़ा, वैसे वैसे रुपये की कीमत में गिरावट भी बढ़ती गई। कारोबार शुरू होने के बाद कुछ ही देर में रुपया कमजोर होकर 80.35 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर आ गया। इस गिरावट के बाद कुछ देर के लिए डॉलर की मांग में कमी आने के संकेत भी मिले, जिससे रुपया रिकवर करके 80.27 के स्तर पर पहुंच गया लेकिन ये स्थिति अधिक देर तक नहीं रही। डॉलर की मांग में एक बार फिर तेजी आई, जिसके कारण भारतीय मुद्रा दोपहर 12 बजे तक डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड गिरावट के साथ लुढ़क कर 80.67 रुपये के स्तर तक पहुंच गई।

मार्केट एक्सपर्ट मयंक मोहन के मुताबिक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने के फैसले की वजह से डॉलर इंडेक्स मजबूत होकर पिछले 20 साल की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है। इसका असर दुनिया भर की मुद्राओं पर कमजोरी के रूप में पड़ा है। इससे भारतीय मुद्रा रुपया भी अछूता नहीं रहा है। मयंक मोहन के मुताबिक अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंका की वजह से अमेरिकी निवेशकों ने दुनिया भर के बाजारों से अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया है, जिसकी वजह से डॉलर की मांग काफी तेज हो गई है।

और भी नीचे जाने की संभावना

यही वजह है कि जहां एक और डॉलर इंडेक्स रिकॉर्ड मजबूती की ओर बढ़ रहा है, वहीं दुनियाभर की दूसरी मुद्राएं रिकॉर्ड लो लेवल की ओर बढ़ती जा रही हैं। अगर जल्दी ही अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुधार जैसे हालात नहीं बने तो आने वाले दिनों में रुपया 81 रुपये के मेंटल बैरियर को पार करके और भी नीचे जा सकता है।

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