पापांकुशा एकादशी के व्रत से मिलती है सभी पापों से मुक्ति, अवश्य करें इस कथा का पाठ

नई दिल्लीः हर माह एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पापांकुशा एकादशी के नाम से जाना जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार पापांकुशा एकादशी का व्रत एवं पूरी श्रद्धा के साथ पूजन करने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। पापांकुशा एकादशी कई पीढ़ियों के पाप कर्मो से भी मुक्ति दिलाती है। इस साल यह एकादशी शनिवार (16 अक्टूबर) को पड़ी है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना और कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए। आइए सुनाते है पापांकुशा एकादशी व्रत की कथा-

हिंदू धर्म की पौराणिक कथा के अनुसार विंध्याचल पर्वत पर एक बहेलिया रहता था जिसका नाम क्रोधन था। वह अपने नाम के अनुसार ही बेहद क्रूर और हिंसक था। उसने अपना सारा जीवन हिंसा, गलत संगति और मद्यपान में बिताया था। एक दिन वह जंगल में शिकार के लिए जा रहा था तभी उसने वहां तपस्या कर रहे ऋषि अंगिरा को देखा। वह उनके आश्रम पहुंचा और उसे ऋषि अंगिरा से कहा कि मेरा कर्म ही बहेलिया का है। इस कारण मैंने जीवनभर निरीह पशु-पक्षियों की हत्या की है। मैंने अपने पूरे जीवन में पाप कर्म ही किये है, इसलिए मुझे नर्क ही जाना पड़ेगा। उसने ऋषि के सम्मुख निवेदन करते हुए कहा कि कृपा कर मुझे कोई ऐसा उपाय बतायें जिससे मेरे सभी पाप खत्म हो जाए और मुझे मोक्ष की प्राप्ति हो जाए।

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बहेलिया की बातें सुनकर ऋषि अंगिरा ने उसे आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पापांकुशा एकादशी के बारे में बताया और उससे विधिपूवर्क व्रत करने को कहा। महर्षि अंगिरा के कथनानुसार बहेलिए ने पूरी श्रद्धा के साथ पापांकुशा एकादशी का व्रत रखा और विधिपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा की। जिससे भगवान विष्णु की कृपा से बहेलिया को सारे पापों से मुक्ति मिल गयी। मृत्यु के बाद जब यमदूत उसे बहेलिए को लेकर यमलोक पहुंचे तो वह चमत्कार देख कर हैरान रह गया। पापांकुशा एकादशी के पुण्य फल के कारण बहेलिए के सभी पाप मिट गये और उसे भगवान विष्णु की कृपा से बैकुंठ लोक की प्राप्ति हुई।

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