अब प्राॅफिट-लाॅस के फाॅर्मूले पर चलेंगी सुपर लग्जरी बसें, वाॅल्वो-स्कैनिया को बेड़े में शामिल करने की तैयारी

लखनऊः उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के यात्रियों का सफर अब सुहाना होने वाला है। परिवहन निगम यात्रियों को कोरोनाकाल में बंद हो चुकी सुपर लग्जरी बसों की सुविधा उपलब्ध कराने वाला है, हालांकि अब इन बसों का संचालन नए फाॅर्मूले पर किया जाएगा। इससे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी। दरअसल, परिवहन निगम प्रबंधन कोरोनाकाल के चलते बंद हुई वातानुकूलित सेवाओं को फिर से शुरू करने जा रहा है। इन एसी बसों का संचालन पी एंड एल सेवा के तहत किया जाएगा। इसके लिए प्राॅफिट-लाॅस का फाॅर्मूला तैयार किया गया है, ताकि इससे परिवहन निगम को राजस्व का नुकसान न हो और यात्रियों को भी बेहतर सफर की सुविधा मिल सके। इसके लिए सवा करोड़ी स्कैनिया और वाॅल्वो को बस बेड़े में शामिल करने की योजना तैयार की गई है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस बार एसी बसों के संचालन की सेवा शर्तों के मानक में बदलाव किया गया है।

एसी बसों को नहीं मिल रहे थे यात्री
कोरोनाकाल के दौरान स्कैनिया और वाॅल्वो बसों को यात्री नहीं मिल रहे थे। यात्रियों की संख्या न के बराबर होने के चलते पूरा नुकसान परिवहन निगम को उठाना पड़ रहा था। इसके चलते रोडवेज ने स्कैनिया और वॉल्वो का संचालन करने वाली कंपनी के साथ करार खत्म कर दिया था। जिसके बाद एसी बसों से लंबी दूरी का सफर करने वाले यात्रियों की मुश्किलें बढ गईं। सबसे अधिक परेशानी लखनऊ से दिल्ली जाने वाले यात्रियों को उठानी पड़ रही है। इसकी वजह यह है कि ट्रेन में रिजर्वेशन न कंफर्म होने पर वाॅल्वो व स्कैनिया यात्रियों की पहली पसंद थे।

यात्रियों को मिल रही थी कई सुविधाएं
वाॅल्वो और स्कैनिया बसें लंबी दूरी के सफर के लिए बेहद आरामदायक थीं, वहीं इन बसों में यात्रियों को कई अन्य सुविधाएं भी मिलती थीं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार परिवहन निगम बस बेड़े में 300 के करीब वाॅल्वो और स्कैनिया शामिल थीं। वातानुकूलित इन बसों में यात्रा के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग के साथ मुफ्त पानी की सुविधा भी दी जाती थी, हालांकि तत्कालीन एमडी राजशेखर ने एसी बसों में मुफ्त पानी की सुविधा को बंद करा दिया था।

लाभ होने पर ही मिलेगा भुगतान
प्राॅफिट-लाॅस योजना के तहत संचालित की जाने वाली वातानुकूलित बसों से लाभ होने पर ही वाहन स्वामी को भुगतान किया जाएगा। इस बार की सेवा शर्तों में यह प्रमुख शर्त होगी। पूर्व में बनाए गए नियम के तहत बस में चार सवारी होने पर ही बस रवाना हो जाती थी, लेकिन निगम को उक्त बस की पूरी सीट के हिसाब से भुगतान वाहन स्वामी को करना पड़ता था। इसके चलते आय कम और निगम को व्यय भार अधिक उठाना पड़ रहा है। इसके चलते नई योजना में लाभ होने पर ही वाहन स्वामी को भुगतान करने की शर्त से वाहन स्वामी भी इसके प्रति गंभीर रहेंगे और इससे निगम को भी फायदा होगा।

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सालाना हो रहा था करोड़ों का नुकसान
एसी बसों के संचालन को लेकर पूर्व में अनुबंध की जो शर्तें बनाई गई थी वह पूरी तरह से वाहन स्वामियों को फायदा पहुंचाने वाली थी। इसके चलते एसी अनुबंधित बसों से परिवहन निगम को लाभ कम और नुकसान अधिक उठाना पड़ा। इन बसों को प्रति किमी 38 रुपए का भुगतान किया जाता था, जो आगे चलकर बढकर 44 रुपए प्रति किमी तक पहुंच गया। सूत्रों की मानें तो सुपर लग्जरी एसी बसों के संचालन से रोडवेज को सालाना 30 से 40 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ता था।

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