Gujarat: नरोदा गाम दंगा मामले कोर्ट का बड़ा फैसला, पूर्व मंत्री समेत सभी 67 आरोपी बरी

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अहमदाबादः गुजरात की एक विशेष अदालत ने कल (गुरुवार) 2002 के नरोदा गाम दंगा (gujarat naroda  gam riot) मामले में गुजरात की पूर्व मंत्री माया कोडनानी, बजरंग दल के पूर्व नेता बाबू पटेल उर्फ बाबू बजरंगी और विश्व हिंदू परिषद के पूर्व नेता जयदीप पटेल समेत सभी 67 आरोपितों को बरी कर दिया। नरोदा गाम में गोधरा मामले के बाद भड़के दंगों में 11 मुस्लिम समुदाय के लोगों की मौत हो गई थी।

बरी किए गए सभी आरोपी जमानत पर थे बाहर

इस घटना के दो दशक से अधिक समय बाद अहमदाबाद स्थित विशेष जांच दल (एसआईटी) मामलों के विशेष न्यायाधीश एस के बक्शी ने यह फैसला सुनाया। इस मामले में कुल 86 आरोपी थे। इनमें से 18 की मुकदमे के दौरान मौत हो गई, जबकि एक को अदालत ने पहले सबूतों के अभाव में दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 169 के तहत बरी कर दिया था। बरी किए गए सभी 67 आरोपी जमानत पर बाहर थे। इस बीच, फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद, कुछ आरोपियों ने कोर्ट के बाहर ‘भारत माता की जय’ और ‘जय श्री राम’ के नारे भी लगाए।

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गोधरा के बाद भड़की थी हिंसा, 11 लोगों की गई थी जान

बता दें कि 28 फरवरी 2002 को गोधरा ट्रेन अग्निकांड के एक दिन बाद बुलाये गए बंद के दौरान अहमदाबाद के नरोदा गाम इलाके में हिंसा भड़क (gujarat naroda  gam riot) गई थी। जिसमें 11 मुस्लिम समुदाय के लोग मारे गए थे। दरअसल गोधरा ट्रेन अग्निकांड 58 यात्री मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर कारसेवक अयोध्या से लौट रहे थे। फैसले के बाद, विशेष अभियोजक सुरेश शाह ने कहा कि अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष ने 2010 में शुरू हुए मुकदमे के दौरान 187 और 57 गवाहों की जांच की थी और लगभग 13 साल तक चले, जिसमें छह न्यायाधीशों ने लगातार मामले की सुनवाई की।

अमित शाह भी कोर्ट में हुए थे पेश, बचाव पक्ष की ओर से दी थी गवाही

इस मामले में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह बचाव पक्ष के गवाह के रूप में अदालत में पेश हुए। कोडनानी ने मौके पर अपनी अनुपस्थिति साबित करने के लिए शाह से पूछताछ की मांग की थी। शाह ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने हिंसा वाले दिन कोडनानी को सुबह करीब 8:30 बजे गुजरात विधानसभा में और दोपहर करीब 11:15 बजे सोला सिविल अस्पताल में थी। न कि नरोदा गाम में जहां पर यह नरसंहार हुआ था।

हालांकि कोडनानी को अहमदाबाद के नरोदा पाटिया इलाके में गोधरा कांड के बाद हुए दंगों से संबंधित मामले में निचली अदालत द्वारा अलग से दोषी ठहराया गया था और 28 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। नरोदा पाटिया में 97 लोगों की हत्या कर दी गई थी। नरोदा गाम नरसंहार 2002 के नौ प्रमुख सांप्रदायिक दंगों के मामलों में से एक था, जिसकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एसआईटी द्वारा जांच की गई थी और विशेष अदालतों द्वारा कोशिश की गई थी।

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