केजीएमयू को मिलेगी नई बिल्डिंग, दोगुनी होगी क्षमता

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KGMU New Building: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) ट्रॉमा सेंटर ने आपातकालीन चिकित्सा देखभाल को मजबूत करने के लिए 500 बिस्तर की नई बिल्डिंग की योजना को मंजूरी मिल गई है। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट अनुमोदन के लिए प्रस्तुत की गई है और वित्त पोषण पर अंतिम निर्णय कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी।

प्रस्तावित विस्तार से ट्रॉमा सेंटर की क्षमता प्रभावशाली 650 बिस्तरों तक बढ़ जाएगी। इसके अतिरिक्त, तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए एक पांच मंजिला इमारत का निर्माण किया जाएगा, जिसमें 24 घंटे डायग्नोस्टिक सुविधा और परिचारकों व खाना पकाने की सुविधाएं शामिल हैं। यह विकास क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा के लिए एक सकारात्मक कदम है। इसके लिए शासन ने 15 करोड़ का बजट स्वीकृत किया है। इस भवन का निर्माण पुराने वाले भवन के ठीक बगल में किया जाएगा।

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी ट्रॉमा सेंटर 500 बिस्तरों वाला एक नया ब्लॉक जोड़कर अपनी रोगी क्षमता को दोगुना कर सकेगा। नई बिल्डिंग के बन जाने से केजीएमयू ट्रामा सेंटर में इलाज के साथ जांच आदि कराने के लिए आए मरीजों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

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सीटी स्कैन व एक्स-रे से लेकर अन्य रिपोर्ट के लिए लैब के चक्कर नहीं काटने होंगे। इसमें 24 घंटा जांच समेत मरीज और तीमारदारों के लिए रहने और खाने की व्यवस्था भी रहेगी। वर्तमान ट्रॉमा सेंटर में लगभग 400 बिस्तर हैं और यहां न केवल लखनऊ, बल्कि अन्य जिलों और यहां तक कि नेपाल से भी मरीज आते हैं। ऐसे में दूर-दराज से आने वाले मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। जानकारी के मुताबिक, केजीएमयू ट्रामा सेंटर में राजधानी के व अन्य जिलों और राज्यों से रेफर किए गए 300 से अधिक गंभीर मरीज रोजाना इलाज के लिए पहुंचते हैं। इसमें गंभीर मरीजों को जांच के लिए सीटी स्कैन, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड समेत लैब आदि की सुविधा मिलती है।

ट्रामा सेंटर के डॉक्टरों पर भारी दबाव देखने को मिलता है। यहां स्थित एक सीटी स्कैन मशीन से प्रतिदिन करीब 200, तीन एक्स-रे मशीन से 150-200 और तीन अल्ट्रासाउंड से 300 जांचें रोजाना की जा रही हैं। भारी संख्या में जांच होने के कारण तीमारदारों को रिपोर्ट के लिए लम्बा इंतजार करना पड़ता है। ट्रामा में तीन सैंपल कलेक्शन सेंटर हैं, जहां हर रोज 350 से ज्यादा सैंपल कलेक्ट किए जाते हैं। जिनकी जांच ट्रामा में बने लैब में होती है, पर बड़ी संख्या में आने वाले मरीजों के कारण यहां जांच के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।

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