भारतीय जन वर्ष सम्वत् 2079

‘भारतीय नव वर्ष सम्वत् 2079, 2 अप्रैल सन् 2022 दिन शनिवार से प्रारम्भ हो चुका है। इस नवसम्वत्सर के राजा ‘शनि’ होंगे। इस सम्वत्सर का शुभारम्भ शनिवार को होने के कारण शनि राजा के पद को धारण करेंगे। इस नव सम्वत्तर का नाम ‘राक्षस’ है। शनि का शासन पूरे विश्व पर पूरे सम्वत्सर अर्थात् वर्षभर रहेगा। इस सम्वत्सर में शास्त्रानुसार फसलों की हानि, महंगाई बढ़ती है। जनता संक्रामक रोगों से पीड़ित होगी। विश्व में दो देशों के मध्य युद्ध की स्थिति बनेगी। यदा-कदा देशों में युद्ध संघर्ष चलते रहेंगे। चोरों का आतंक रहेगा तथा लोग भूख से पीड़ित होंगे। वर्ष के प्रारम्भ में 2 अप्रैल से शनि स्वराशि मकर में मंगल के साथ विराजमान रहेंगे, जिससे भीषण गर्मी बढ़ती है। देश में अग्निकाण्ड की अनेक घटनाएं घटेंगी।, विश्व में युद्ध संघर्ष के योग बनेंगे। शासकों के मध्य संघर्ष व्याप्त रहेगा, जिससे जन-धन की क्षति सम्भव होगी। वर्षाकाल में साधारण वर्षा होने के योग बनेंगे। यद्यपि कुछ प्रान्तों में अल्पवृष्टि एवं सूखा पड़ने के योग होंगे। देश के कुछ भागों में अतिवर्षा होगी, जिससे सर्वत्र जलभराव हो जाएगा। देश के पश्चिमी प्रदेशों में सूखा जैसी स्थिति बनेगी। इस सम्वत्सर में मेष संक्रान्ति गुरुवार को पड़ रही है। अतः गुरु इस सम्वत्तर में मंत्री पद पर सुशोभित होंगे। राजा शनि के मंत्रिमंडल में कुल 10 विभाग होगें। यथा राजा, मंत्री, सस्येश (कृषि-उपज-पैदावार), दुर्गेश (सुरक्षा), धनेश (वित्त विभाग) रसेश (रस पदार्थ), धान्येश (खाद्य पदार्थ), नीरसेश (खनिज-धातु), फलेश (फल, उद्यान, उपवन) व मेघेश (वर्षा) इन्हीं दस विभागों द्वारा इस पूरे विश्व तथा भारत देश में होने वाली घटनाओं का सूत्रपात होगा। संवत्सरीय ग्रह सभासदों के दस विभागों में से पांच विभाग शुभ ग्रहों के पास हैं तथा पांच विभाग क्रूर ग्रहों के पास हैं जिसके परिणाम स्वरूप देश एवं जनता में कई प्रकार के प्राकृतिक विपरीतता के रहते हुए भी कई क्षेत्रों में शासकों एवं जनता को शुभ परिणाम प्राप्त होंगे।

‘राक्षस’ नामक सम्वत्सर में शास्त्रानुसार धान, मूंग आदि फसलों की उपज अल्प होगी। जन सामान्य को महंगाई से कष्ट प्राप्त होता है, संक्रामक रोग का भय रहता है, ज्वरादि संक्रामक रोगों से कष्टप्राप्त होगा। वर्षा ऋतु में भाद्रपद मास में कहीं-कहीं अधिक वर्षा होगी। शासक वर्ग तथा जनता को सामान्य सुख की प्राप्ति होगी। सब लोग अपने-अपने कार्यों में संलग्न रहेंगे। समाज में चोर आधुनिक तकनीक का प्रयोग करके जनता का धन हरण करने वाले होंगे। लुटेरों का गुट लोगों को उनके धन और सम्पदा से विमुख कर देगा। जनता भूख और बीमारियों के कारण दुःख से ग्रसित रहेगी। कुछ प्रान्तों में फसलें पानी के अभाव के कारण बर्बाद हो जाएंगी और कुछ जगहों पर आधुनिक तरीके से सिंचाई करके फसलों को बचाया जाएगा। ज्वर, बुखार गर्मी से होने वाले संक्रामक रोग, त्वचा विकार, सूखा रोग जैसी अनेक बीमारियां फैलेंगी। यद्यपि राजा शनि स्वगृही राशि में बलवान होते हैं तथा मंत्री गुरु की शुभता के कारण देश के अधिकांश भू-भाग पर समयानुकूल उत्तम वर्षा होती है। 13 अप्रैल से गुरु स्वराशि मीन में प्रवेश करेंगे। अतः मंत्री गुरु स्वराशि का बलवान होकर देश में सन्तुलन का वातावरण बनाता है। बाजारों में चहल-पहल बढ़ेगी। देश में आर्थिक स्थिति सुदृढ़ बनने लगेगी। लेखकों एवं ग्रन्थकारों, शिक्षकों का गौरव बढ़ेगा। धार्मिक संस्थाएं, अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार, देश की न्याय प्रणाली एवं न्यायिक संरचना, यातायात ट्रान्सपोर्ट इत्यादि के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य, शासक वर्ग द्वारा किए जाएंगे।

अधिकारी वर्ग सामान्य जनता के उपयोगी कार्य करेंगे। शासक वर्ग सत्ताधारी के लिए यह वर्ष अनेक दृष्टियों से काफी अनुकूल रहेगा। भारत देश की सीमाओं पर युद्ध जैसा तनाव व्याप्त रहेगा। देश के पूर्वी भाग में पूर्वांचल में अत्यधिक वर्षा के कारण बाढ़ से फसलों को क्षति पहुंचेगी। बिहार राज्य में बाढ़ से जन-धन को क्षति पहुंचेगी। बंगाल में हिंसा से, प्राकृतिक आपदा से जन-धन की क्षति होगी। देश के उत्तरी भाग एवं दक्षिणी भाग में खाद्यानों का प्रचुर उत्पादन होगा। देश के पश्चिमी भाग में महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात में वर्षा कम होगी तथा सूखा से जनता पीड़ित रहेगी। देश के मध्य भाग मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश में साधारण खाद्यानों का उत्पादन होगा। देश में शासक वर्ग द्वारा विभिन्न प्रकार के करों से प्रचुर धन राशि एकत्रित होगी। देश का खजाना कर से भरा रहेगा। जनता के लिए तथा देश की कल्याणकारी परियोजनाओं में शासक वर्ग द्वारा धन का निवेश किया जाएगा। सुविधाओं एवं समस्याओं का सन्तुलन बनता-बिगड़ता रहेगा। कभी सरकार के कार्यों की प्रशंसा की जाएगी, तो कभी प्रशासनिक निर्णयों पर सामान्य जनता सरकार का विरोध करेगी। सभी प्रकार के खाद्यान्न, तेल, डीजल-पेट्रोल इस वर्ष इनके मूल्य बढ़े रहेंगे, जिससे महंगाई फैलेगी। भाद्रपद मास अर्थात 13 अगस्त 2022 ते 08 नवम्बर 2022 तक कई विपरीत दैवी प्राकृतिक घटनाओं का समय रहेगा। अनेक प्रकार की बीमारियां फैलेंगी तथा दैवी प्राकृतिक आपदा से धन-जन की क्षति होगी। अतिवर्षा, बाढ़ से फसल नष्ट होने से जनता भूख से पीड़ित रहेगी। भूकम्प एवं समुद्री तूफान की सम्भावना बनेगी। मच्छरों से पैदा होने वाला रोग बढ़ेगा, विषैले जन्तुओं से, संक्रामक रोगों से जनता पीड़ित रहेगी। भय का वातावरण बनेगा।

भारत की राजनीति में विशेष कानून व्यवस्था लागू होने से विपक्षी दलों का आन्दोलन होगा। यान दुर्घटना, बाढ़, भूकम्प से जन-धन की क्षति होगी। देश के पश्चिमी प्रदेशों में राजनैतिक अस्थिरता का वातावरण बनेगा। सत्ता का संघर्ष छिड़ेगा। किसी राजनैतिक या सम्मानित महत्वपूर्ण व्यक्ति के वियोग के दुःख का सामना करना पड़ेगा। आकाशीय बीजली से जन-धन की क्षति सम्भव होगी। तूफानी वर्षा से खड़ी फसलों की हानि होगी। विश्व में मुस्लिम राष्ट्रों में जन-धन की क्षति होगी। ईरान, ईराक, तुर्की व चीन देशों में शासक विरोधी आन्दोलन, हिंसा रक्तपात, उत्पात एवं हिंसक घटनाओं से जनता में भय बढ़ेगा। किसी देश के प्रधान नेता को स्वास्थ्य पीड़ा, हत्या या दुर्घटना से पीड़ित होने का योग बनेगा या मृत्यु सम्भव होगी। यूरोप के कई देशों में जनाक्रोश बढ़ेगा। प्राकृतिक घटनाओं से कई देश प्रभावित रहेगें। चीन, जापान, रूस, तिब्बत, म्यांमार राष्ट्रों में भूकम्प, भूस्खलन आदि प्राकृतिक प्रकोप से जन-धन की हाति होगी। मुस्लिम राष्ट्रों में वातावरण किसी विशेष को लेकर भयंकर युद्ध जैसी स्थितियों का कारण बनेगा। लंका, कम्बोडिया, अफगानिस्तान, ईरान, अफ्रीका राष्ट्र व रूस आदि में आन्तरिक स्थितियां तनावमुक्त रहेंगी। इस वर्ष विश्व में दो खण्ड सूर्य ग्रहण तथा दो खग्रास चन्द्रग्रहण लगेंगे। 30 अप्रैल 2022 को खण्ड सूर्य ग्रहण लगेगा। यह ग्रहण दक्षिण-पश्चिम अमेरिका, पैसफिक, अटलांटिक एवं अंटार्कटिका के क्षेत्रों में दिखाई देगा। यह ग्रहण भारत के भूभाग में दृश्य नहीं होगा अतः भारत में इस ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं होगा। 16 मई 2022 को खग्रास चन्द्रग्रहण लगेगा, किन्तु यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। अतः भारत पर इसका कोई प्रभाव नहीं होगा। यह सग्रास चन्द्रग्रहण यूरोप, दक्षिण पश्चिम एशिया, अफ्रीका, अधिकांश उत्तर अमेरिका, रोम, बुसेल्स, लंदन, पेरिस, चिली, ब्राजील, पुर्तगाल आदि क्षेत्रों में दृश्य होगा। इन ग्रहण के प्रभाव में इन देशों में सामाजिक अशांति, महामारी का प्रकोप, आर्थिक क्षति, भूकम्प, बाढ़, हिमपात एवं प्राकृतिक आपदा से जन-धन की क्षति होगी। विदेश में किसी प्रभावशाली राजनेता, राजशाही महत्वपूर्ण व्यक्ति का शोक सम्भव होगा।

भारत में इस वर्ष दो ग्रहण दृश्य होंगे। 25 अक्टूबर 2022 को खण्ड सूर्य ग्रहण के रूप में दिखेगा। भारत के अलावा यह यूरोप, उत्तरी अफ्रीका, मध्यपूर्व और पश्चिम एशिया के क्षेत्रों में दिखेगा तथा 15 दिन के अन्दर दूसरा खग्रास चन्द्रग्रहण 8 नवम्बर 2022 को दिखेगा। भारत के अलावा यह खग्रास चन्द्रग्रहण एशिया, ऑस्ट्रेलिया, पैसफिक क्षेत्र, उत्तरी और मध्य अमेरिका तथा दक्षिण अमेरिका, सुमात्रा, मध्य चीन, मंगोलिया, मध्य रूस में दृश्य होगा। भारत में कार्तिक मास में ग्रहण के कारण बिहार, पूर्वी भारत, अयोध्या, मथुरा, काशी में अशान्ति, मंत्रियों व सचिवों को कष्ट, प्रायः सभी शासकों को संघर्ष एवं देशव्यापी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। लेकिन कार्तिक मास में सूर्य एवं चन्द्रग्रहण भारत देश में वर्षा एवं कृषि उपज के लिए शुभ परिणाम देने वाला होगा। तुला राशि में सूर्य ग्रहण होने से भारत में व्यापार, अर्थनीति, टैक्स आदि विषय में कुछ संशोधन होने के योग बनेंगे एवं धन बाजार के नियमों की पुनर्व्यस्था की जाएगी। मेष राशि में चन्द्र ग्रहण लगने से भारत में शस्त्रधारी सैनिक, पुलिस, सेना, अर्धसैनिक बल, शस्त्र विनियमन विभाग में खलबली, अग्नि से रोजगार करने वाले को कष्ट, श्रम, यथा सुनार, लोहार, गैस संयंत्र, ढाबे, अग्नि के स्थान जैसे- थर्मल पावर, बिजली घर आदि में कष्ट की वृद्धि, पीड़ा और बिजली की कमी से जनता पीड़ित रहेगी। राजपक्ष को कष्ट, शासकदल में विग्रहवाद से हानि, प्रदेश में अग्निकाण्ड एवं विस्फोट की घटनाएं घटेंगी। भारत में उत्तर प्रदेश, नेपाल की सीमा, चीनी सीमा पर, बंगाल, भारत के पूरे पूर्वी सीमान्त पर उपद्रव एवं हिंसा होगी। स्त्रियों, उच्च शिक्षित वर्ग व शासकों को कष्ट का सामना करना पड़ेगा। भारत में राजनैतिक दलों में मतभेद बढ़ेगा, आरोप प्रत्यारोप का दौर बढ़ेगा। भारत के पश्चिमी सीमान्त पर विस्फोट, आतंकवादी गतिविधि एवं हिंसा से अशांति फैलेगी। सूर्य एवं चन्द्रग्रहण से 6 माह के अन्तर्गत हिंसा, विस्फोट, आतंकवादी गतिविधि एवं पाकिस्तान-भारत की सीमान्त में हिंसात्मक गतिविधि, आतंकवादी घुसपैठ से परेशानी व अशांति प्राप्त होगी। 29 अप्रैल 2022 से 16 मई 2022 तक कुम्भ राशि में मंगल व शनि की युति भारत देश में किसी प्रान्त में उपद्रव, अग्निकाण्ड, प्राकृतिक उत्पात, राजनैतिक प्रकोपों से जन-धन की क्षति सम्भव होगी। किसी प्रभावशाली राजनैतिक व्यक्ति अथवा बड़े उद्योगपति, सिनेमास्टार को पीड़ा या वियोग प्राप्त होगा। विश्व में संयुक्त राष्ट्र अमेरिका एवं अन्य शक्तिशाली देशों में अशांति, प्राकृतिक उत्पात, महामारी रोग-भय, राजनैतिक उथल-पुथल एवं युद्ध जैसी परिस्थितियां उत्पन्न होंगी। विश्व में एवं भारत देश में भूकम्प, आंधी, तूफान एवं अग्निकण्ड से जनधन की हाति सम्भव होगी। ब्रिटेन, चीन, सिंगापुर, अमेरिका में नए की प्रकार महामारी, संक्रमक रोग की वृद्धि, प्राकृतिक आपदा से जन-धन की क्षति सम्भव होगी। इस वर्ष शेयर बाजार में प्रायः तेजी का रूख रहेगा। प्रायः ज्येष्ठ माह अर्थात् 17 मई से 14 जून 2022 तक कई दृष्टियों से कष्टकारक रहेगा। इस माह में कुल पांच मंगलवार पड़ने से अनेक प्रकार के ज्वर बीमारीयां या बुखार करने वाली बीमारी का संक्रमण बढ़ेगा। किसी प्रकार की महामारी का रूप बनेगा, भीषण अग्निकाण्ड से जन-धन को क्षति पहुंचेगी। लू का प्रकोप बढ़ेगा। जून, जुलाई में साधारण वर्षा के योग बनेंगे। भाद्रपद मास अर्थात् 12 अगस्त से 10 सितम्बर 2022 तक पांच शनिवार व शनिवार की अमावस्या कई विपरीत परिस्थितियां पैदा करेंगी। नई बिमारी का प्रकोप बढ़ेगा। रोगाणुओं से युक्त मिली-जुली संक्रामक बिमारीयां फैल कर धन-जन को क्षति पहुंचायेंगी। सभी जगह भारी वर्षा होगी। बाढ़ का प्रकोप बढ़ेगा। फसलों की हानि होगी। आश्विन मास अर्थात 11 सितम्बर से 9 अक्टूबर 2022 में बुद्ध, गुरु एवं शनि तीन ग्रह एक साथ वक्री चलेंगे एवं पांच रविवार व रविवार की अमावस्या जनता में अनेक प्रकार की बिमारीयां डेंगू मलेरिया, मस्तिष्क ज्वर, निमोनिया, श्वांस की बिमारीयां, खांसी, कई प्रकार की संक्रामक महामारी से जन-धन की क्षति सम्भव होगी तथा दैवी-प्राकृतिक आपदा से क्षति पहुंचेगी। भूकम्प, समुद्री तूफान के योग बनेंगे। माघ मास अर्थात 7 जनवरी से 5 फरवरी 2022 के तक पांच शनिवार, पांच रविवार एवं शनिवार की अमावस्या व शनिवार की मकर संक्रान्ति बड़ा भीषण योग बना रही है। किसी दैवी प्राकृतिक आपदा, भूकम्प, हिमपात, भूस्खलन, भीषण ठण्ड पड़ेगी। राजनैतिक व्यक्तियों को संकट, व्यापारियों को कष्ट, शेयर बाजार मंदा, भारत के पूर्वी या पश्चिमी सीमा पर विस्फोट, सैन्य तनाव, पहाड़ी क्षेत्रों में, उत्तराखण्ड में एवं उत्तरी क्षेत्रों पर भारी हिमपात से जन-धन क्षति सम्भव होगी। मार्च 2022 में मौसम में फेरबदल से, ओला पड़ने से फसल नष्ट होगी। भारत में आतंकवादी , विस्फोट की घटना से जन-धन की क्षति होगी।

इस वर्ष मंत्री गुरु होने से बहुत सी अशुभ घटनाओं पर नियन्त्रण रहेगा। शासक द्वारा उचित सूझ-बूझ से शासन व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने के योग बनेंगे। यदा-कदा कुछ नीतियों में संशोधन के फलस्वरूप जनता में रोष रहेगा। खाद्य तेल, पेट्रोल, डीजल एवं कर में वृद्धि होने से महंगाई बढ़ी रहेगी। वर्षा अधिक होगी। शासक वर्ग जनता पालन में लगे रहेंगे। बाढ़ से फसल एवं पशु चारा की क्षति सम्भव होगी। शासन द्वारा जनता में चिकित्सा व्यवस्था के द्वारा रोग पर काबू पाना सम्भव होगा। साफ-सफाई के विभिन्न अभियान चलाए जाएंगे। धार्मिक स्थलों, पर्यटन स्थलों का सौन्दर्यीकरण होगा। कहीं-कहीं सूखा, आकाल पड़ने से जनता शासकों से असंतुष्ट रहेगी। लोहे का सामान, मशीनरी, हार्डवेयर, काले वस्त्रादि वस्तुएं, शीशा आदि महंगे होते जाएंगे। व्यापारी लोग धन की कमी के कारण, कृषि करने वाले किसान तथा ब्राह्मण वर्ग आर्थिक उतार-चढ़ाव से मानसिक कष्ट से दुःखी रहेंगे। ग्रीष्मकालीन धान्य उत्पत्ति के विचार से रवी की फसल संतोषप्रद होगी। भारत के पूर्व व दक्षिण भाग में कहीं-कहीं उपज की हानि, बाढ़ का प्रकोप तथा फसलों के मूल्य की वृद्धि होगी। खरीफ का उत्पादन संतोषप्रद रहेगा। दक्षिण, पश्चिम भाग में फसलों की क्षति होगी। फसलों का मूल्य सर्दियों में सामान्य रहेगा।

इस सम्वत्सर में समय का वाहन घोड़ा होने से भूकम्प, उत्पात, महाभय की स्थिति, विश्व में शासकों, देशों में युद्ध तथा कहीं वर्षा की कमी व कहीं वर्षा की अधिकता से कष्ट प्राप्त होगा। इस वर्ष सम्वत्सर का निवास कुम्हार के घर में होने से फलस्वरूप यह वर्ष मध्यम रहेगा। देश के पूर्वोत्तर भाग में आकाशीय बिजली का प्रकोप, चक्रवात, बाढ़ आदि जलीय आपदा का प्रकोप रहेगा। गर्मी अधिक होगी। देश के पश्चिम (महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान) व दक्षिण भारत में बाढ़ या जल संकट तथा वायुवेग तूफान आंधी का प्रकोप रहेगा।