फीफा वर्ल्ड कप में जाकिर नाईक को बुलाने पर नाराज हुआ भारत, कतर ने सफाई देते हुए कही ये बात

दोहाः विश्व कप फुटबाल उद्घाटन समारोह में भारत के भगोड़े जाकिर नाईक के शामिल होने की खबरों पर कतर ने अपनी सफाई देते हुए कहा है कि उसने जाकिर को किसी भी तरह का कोई आधिकारिक निमंत्रण नहीं दिया। दोहा ने कहा कि अन्य देशों द्वारा गलत सूचना फैलाने से दोनों देशों के बीच के रिश्ते प्रभावित हो रहे हैं। कतर की तरफ से यह प्रतिक्रिया भारत की उस आपत्ति के बाद आई है, जिसमें कहा गया था कि अगर विश्व कप के उद्घाटन समारोह में नाईक को आमंत्रित किया गया तो भारत उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की 20 नवंबर की प्रस्तावित यात्रा को रद्द कर देगा। कतर ने आधिकारिक माध्यम से भारत को सूचना देते हुए कहा कि उसने भगोड़े जाकिर नाइक को विश्व कप उद्घाटन समारोह में न तो आधिकारिक निमंत्रण दिया था और ना ही उसे महत्वपूर्ण हस्तियों की सूची में शामिल किया था।

एक रिपोर्ट के मुताबिक सूचना थी कि नाईक मलेशिया से कतर निजी दौरे पर यात्रा कर सकता है। इसकी जानकारी होने पर केंद्र की तरफ से पहली प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा था कि भारत इस मामले को संबंधित अधिकारियों के समक्ष मजबूती से रखेगा और इसका विरोध करेगा। पुरी से कतर के नाईक को विश्व कप फुटबाल में आमंत्रित करने के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि इस संबंध में उनको कोई जानकारी नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत इसका विरोध करेगा, तब उन्होंने जवाब देते हुए कहा, भारत इस मुद्दे को उठाएगा, लेकिन प्रश्र यह है कि अगर मलेशियाई नागरिक को कही आमंत्रित किया जाता है तो वे बेहतर जानते हैं। मेरी भी जानकारी उतनी ही है जितनी की आप की। पुरी ने कहा कि अगर आप जाकिर नाईक के बारे में मेरा जानना चाहते हैं तो मेरा भी विचार वही होगा जो आपका है। जहां तक नाईक के संदर्भ में हमारा (भारत) विचार है, हम संबंधित आधिकारिक मंच पर अपना तथ्य मजबूती के साथ रखेंगे।

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गोवा के एक भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि इस मुद्दे पर भारतीयों को विश्व कप का बहिष्कार करना चाहिए। भारत में वांछित नाईक वर्ष 2016 से मलेशिया में है, उस पर भारत में मनी लांड्रिंग और नफरती भाषण से धार्मिक उन्माद फैलाने का आरोप है। मार्च 2022 में गृहमंत्रालय ने नाईक को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत उसके इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ) को गैरकानूनी संगठन करार देते हुए पांच साल के प्रतिबंधित कर दिया था। भारत ने नाईक के प्रत्यर्पण के लिए मलेशिया से भी अनुरोध किया था, क्योंकि उसकी वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों में कथित भूमिका थी। वर्तमान में इंटरपोल द्वारा नाईक के खिलाफ रेड कार्नार नोटिस जारी किया हुआ है। उसके घृणा फैलाने वाले भाषणों के लिए ब्रिटेन और कनाडा द्वारा मलेशिया के 16 प्रतिबंधित लोगों में नाईक भी शामिल है।

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