देश में बढ़ता आतंकवाद का खतरा

उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल समेत देश के कई राज्य आतंकवादियों के निशाने पर हैं। लखनऊ से अलकायदा से जुड़े दो आतंकवादियों को पकड़कर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने एक बार फिर दहशतगर्दों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। एक ही दिन 11 जुलाई को कोलकाता पुलिस के विशेष कार्यबल ने हरदेवपुर इलाके, यूपी पुलिस के आतंकनिरोधी दस्ते ने लखनऊ और नेशनल इंटेलिजेंस एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर और अनंतनाग जिले में सात स्थानों पर छापे मारकर न केवल देश को कई बड़ी भयावह आतंकी वारदातों से बचा लिया बल्कि इस बात का संकेत भी दिया कि आतंकी अगर डाल-डाल पर हैं तो सुरक्षा एजेंसियां पात-पात हैं। वे देश में होने वाली किसी भी आतंकी हरकत को लेकर चौकस भी हैं और मुस्तैद भी। एक दिन में 11 से अधिक आतंकियों और स्लीपर सेल के मॉड्यूल्स का पकड़ा जाना इस बात का गवाह है कि देश को बर्बाद करने की कितनी बड़ी साजिश है। इस काम में पाकिस्तान और उसके आतंकी संगठन जितने सक्रिय हैं, उतने ही सक्रिय अपने देश की पीठ में छुरा भोंकने वाले लोग भी हैं। अलकायदा, आईएएस और पाकिस्तान के अन्य आतंकवादी संगठनों ने देश के कई राज्यों के कई बड़े शहरों में अपने स्लीपर सेल विकसित कर लिए हैं। जो पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के एक इशारे पर भारत में विस्फोटक घटनाओं को अंजाम दे सकते हैं।

साल भर में दस-बारह आतंकी संगठनों के माड्यूल का खुलासा यह बताने-जताने के लिए काफिल है कि इस देश की सुरक्षा एजेंसियों को आतंकवादियों को लेकर गाफिल होने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। लखनऊ, कानपुर, सहारनपुर, बिजनौर, मेरठ,पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में जिस तरह स्लीपर सेल के भंडाफोड़ समय-समय पर हो रहे हैं, उसे बहुत हल्के में नहीं लिया जा सकता। लखनऊ में पकड़े गए मिन्हाज और मशीरुद्दीन से पूछताछ में जिस तरह खलासे हो रहे हैं और जिस तरह उनके मददगारों का पता चल रहा है, वह न केवल विस्मयकारी है,वरन रोंगटे भी खड़ा करने वाला है। असलहों की सप्लाई एक हिस्ट्रीशीटर करे और फंडिंग प्रॉपर्टी डीलर तो समझा जाना चाहिए कि उत्तर प्रदेश में देशद्रोहियों की नस्लें किस तरह फल-फूल रही है। एक वर्गविशेष से जुड़ाव की वजह से देश के कुछ राजनीतिक संगठन भी आतंकवादियों के बचाव में बयानबाजी करते नजर आते हैं। उन्हें कार्रवाई के समय पर एैतराज होने लगता है। आतंकवादी चुनाव होना है, इसलिए हमला नहीं करने का विचार करेंगे क्या? हाल ही में कानपुर के एक उदारवादी मुस्लिम धार्मिक नेता ने कहा है कि कानपुर शहर में जगह-जगह मुस्लिम बहुल इलाके में चंदे के डिब्बे रखे गए हैं। इस चंदे की रकम को ईरान और पाकिस्तान भेजा जाता है। यह रकम आतंकी स्लीपर सेल की मदद के काम आती है। इस तरह चंदों की कसरत प्रदेश और देश के अन्य शहरों में भी हो रही होगी, पुलिस प्रशासन को इस ओर भी ध्यान होगा। प्रवर्तन निदेशालय को भी इस बावत अपनी नजरें खुली रखनी होगी। अपने ही धन से अपनी ही बर्बादी का तमाशा देखने का चमत्कार भारत में ही संभव है और जब कार्रवाई होती है तो अक्सर यही कहा जाता है कि सरकार बदले की भावना के तहत काम कर रही है।

जम्मू-कश्मीर में सेना एक तरह से आतंकवाद का सफाया कर चुकी है। आतंकियों की घुसपैठ रुकी हुई है, इसके बाद भी आए दिन आतंकी सेना और पुलिस के जवानों पर हमले करते रहते हैं। ये आतंकवादी पाकिस्तान से आते और कश्मीर में छिपते रहे हैं और जब भी उन पर कार्रवाई की नौबत आई तो स्थानीय लोग भी सेना और पुलिस पर पत्थरबाजी करते रहे हैं। यह स्थिति बहुत मुफीद नहीं है और अब तो आतंकवादियों ने बंकरों और गुफाओं तक में अपनी शरणगाह बना ली है। यह सब स्थानीय नागरिकों के सहयोग के बिना कैसे हो सकता है? पाकिस्तानी घुसपैठियों की सुरक्षित वापसी कठिन जानकर पाकिस्तान ने पिछले दिनों ड्रोन हमले की कोशिश की थी लेकिन ड्रोन को लेकर भारत जिस तरह सतर्क हुआ है,उससे भी पाकिस्तान की चिंता का ग्राफ बढ़ा है।

भारत को परेशान करने के बहुविध प्रयास वह करता ही रहता है। इसके लिए वह केवल कश्मीरी युवकों कोही गुमराह कर रहा हो, ऐसा भी नहीं है, वह देश के अनेक राज्यों में बेरोजगार युवकों को आतंकवादी संगठन से जोड़ रहा है और उनके मन में भारत के खिलाफ जहर घोल रहा है। भारत को दहलाने की साजिश तो आतंकी आजादी के बाद से ही कर रहे हैं। कई बार वे अपने मंसूबों में सफल हुए हैं लेकिन अधिकांश मोर्चों पर उन्होंने भारतीय सुरक्षा बलों की सजगता की वजह से मुंह की भी खानी पड़ी है लेकिन इन दिनों जिस तरह आतंकवादी सक्रिय हुए हैं और देश के कई बड़े शहरों में उन्होंने अपने स्लीपर सेल विकसित कर लिए हैं, यह स्थिति बहुत ही चिंताजनक है। जिन किन्हीं शहरों में सेना मुख्यालय हैं, वहां टायर पंक्चर बनाने वाले मैकेनिकों की उपस्थिति चौंकाती भी है और सोचने को बाध्य भी करती है। चाय और पान मसाला की दुकानें भी एक खास वर्ग के लोगों की ही होती है। सैनिकों से जान-पहचान के बहाने वे सेना मुख्यालय में अक्सर आते-जाते भी रहते हैं। ऐसे लोगों पर आतंकियों की सीधी नजर रहती है। चंद पैसों का लालच देकर वे उन्हें अपने पक्ष में कर लेते हैं और अपना उल्लू साधते रहते हैं।

इंदौर पुलिस की सरकारी वेबसाइट हैक कर लेना और पुलिस अधिकारियों के नाम के आगे फ्री कश्मीर और पाकिस्तान जिंदाबाद लिखा जाना यह बताता है कि दहशतगर्दों के हौसले कितने बुलंद हैं। इंदौर के एक इलाके को वैसे भी मिनी पाकिस्तान कहा जाता है। कोई साल नहीं जाता जब इस क्षेत्र में सांप्रदायिक दंगे न होते हों। सिमी, अलकायकदा और जमात उल मुजाहिदीन से जुड़े यहां कई युवक हैं जो देश की कानून व्यवस्था के लिए घातक बने हुए हैं। ऐसे युवकों पर नजर रखने की जरूरत है।

लखनऊ में पकड़े भी आतंकी पकड़े और मारे जा चुके हैं। उत्तर प्रदेश अदालतों तक में आतंकी हमले हो चुके हैं, ऐसे में आतंकवादियों पर विशेष नजर रखने की जरूरत है और अब तो यह भी बताया जा रहा है कि लखनऊ में पकड़े गए मिन्हाज और मशीरुद्दीन की नजर अयोध्या स्थित रामजन्मभूमि को निशाना बनाने की थी। यह अच्छी बात है कि जब भी इस तरह की कोई घटना होती है, देश और प्रदेश में सतर्कता बढ़ जाती है। अलर्ट घोषित हो जाता है लेकिन सजगता और सतर्कता की निरंतरता बनी रहनी चाहिए। आतंकवादियों की गतिविधियों पर निरंतर नजर रखाकर ही हम इस देश को सुरक्षित रह सकते हैं और लोगों के जान-माल की रक्षा कर सकते हैं। इसके लिए पुलिस प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को तो हर क्षण सतर्क रहना ही चाहिए,आमजन को भी सतर्क रहना चाहिए। हमें अपने पास-पड़ोस की गतिवधियों पर नजर रखनी चाहिए और ज्यों ही कोई चीज संदिग्ध नजर आए,उससे पुलिस को अवगत कराना चाहिए। आतंकवादी कूकर बम, अटैची बम, घड़ी बम जैसे प्रयोग कर सकते हैं, इसलिए जरूरी है कि ऐसी वस्तु जो संदिग्ध नजर आए, उसे उठाने की बजाए पुलिस को बताना चाहिए।

पुलिस और उसके सूचना तंत्र की मजबूती से ही आतंकवादी गतिविधियों को नियंत्रित किया जा सकता। इसलिए जरूरी है कि पुलिस को अपना तलाशी अभियान तेज करना चाहिए। उन धार्मिक संस्थाओं और शिक्षण संस्थाओं पर भी नजर रखनी चाहिए जो दुष्प्रचार और नफरत के शोशे उछालकर इस देश की शांति-व्यवस्था में खलल डालती हैं या डालने की कोशिश करती हैं। राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए। आतंकी हलचल जिस तरह कश्मीर की वादियों से निकलकर देश के अन्य प्रदेशों के संवेदनशील शहरों में बढ़ रही है, यह अपने आप में बड़ा खतरा है। आतंकियों के एकाध खुलासों से ही बात नहीं बनने वाली है। पुलिस प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को आतंक के सभी नेटवर्क ध्वस्त करने की दिशा में काम करना होगा। आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देना का यही एक तरीका भी है। जरा सी भी असावधानी देश को बड़ी मुसीबत में डाल सकती है। इसलिए भी आतंकवादियों और उनके प्रभाव में आकर गुमराह हो रहे युवा वर्ग की पल-पल की जानकारी लेते रहने की जरूरत है।

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आतंकवादियों को विश्वास की आंखों से नहीं देखा जा सकता लेकिन जरा सी सावधानी बरत कर नीर-क्षीर विवेक तो किया ही जा सकता है। देश में आंतरिक असुरक्षा के हालात न बनें, इस पर ध्यान देना हर भारतवासी की जिम्मेदारी है।

सियाराम पांडेय