पंजाबः मुख्तार अंसारी को जेल में वीआईपी ट्रीटमेंट मुद्दे पर विधानसभा में हंगामा

मुख्तार अंसारी

चंडीगढ़ः उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर मुख्तार अंसारी को पंजाब की जेल में वीआईपी सुविधाओं के साथ रखने के मुद्दे पर मंगलवार को विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। पंजाब के जेल मंत्री ने इस मामले में जहां एफआईआर के आदेश जारी कर दिए वहीं कांग्रेस ने गैंगस्टर लारेंस बिश्नोई के मुद्दे पर आप सरकार को घेरा। मामला बढ़ते देख विधानसभा स्पीकर ने हस्तक्षेप किया और सभी विधायकों को निर्देश दिए कि वह केवल बजट पर चर्चा करें। विधानसभा में आज से आम बजट पर चर्चा शुरू हुई है। कांग्रेस विधायक अमरिंदर सिंह राजा वडि़ंग द्वारा खनन का मुद्दा उठाए जाने पर खनन एवं जेल मंत्री हरजोत बैंस ने सदन में खनन पर तीन माह के भीतर किए गए कार्यों पर रिपोर्ट पेश करनी शुरू की। इस बीच हरजोत बैंस ने जेलों में किए गए बदलाव पर बोलना शुरू किया।

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हरजोत बैंस ने कहा कि पंजाब की पूर्व कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल में मोहाली में एक फर्जी एफआईआर दर्ज कर गैंगस्टर मुख्तार अंसारी को दो साल तीन महीने तक रूपनगर की जेल में रखा। जेल की जिस बैरक में 25 कैदी होने चाहिए थे उसमें केवल अंसारी को रखा गया और उसकी पत्नी भी साथ रही। जेल मंत्री ने आगे कहा कि जिस एफआईआर के बल पर अंसारी को रोपड़ जेल में रखा गया उसमें कभी चालान ही पेश नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने कई बार अंसारी के प्रोडक्शन वारंट जारी करवाए लेकिन पंजाब की पूर्व कांग्रेस सरकार ने उनका कभी जवाब नहीं दिया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में गया तो पंजाब सरकार ने वहां अंसारी का बचाव करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक प्राइवेट वकील की सेवाएं ली। जेल मंत्री बैंस ने कहा कि एक गैंगस्टर की पैरवी के लिए वकील का 55 लाख का बिल पंजाब सरकार के पास अदायगी के लिए आया हुआ है।

बैंस ने कहा कि पंजाब सरकार ने नियमों का उल्लंघन करके गैंगस्टर को संरक्षण दिया। इसके लिए एफआईआर के आदेश जारी कर दिए गए हैं। जेल मंत्री की इस रिपोर्ट के बाद विपक्षी विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया। नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा ने भी गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के मुद्दे पर पंजाब सरकार को घेरना शुरू कर दिया। बाजवा ने कहा कि बजट पर चल रही चर्चा को गलत दिशा में ले जाया जा रहा है। इस मुद्दे पर सदन में काफी देर तक हंगामा हुआ। कांग्रेसी विधायक अपनी कुर्सियां छोड़कर स्पीकर की बेल तक बढ़े। हंगामे के बीच स्पीकर ने स्थिति संभाली और सभी विधायकों एवं मंत्रियों को निर्देश दिए कि वह केवल बजट पर ही चर्चा करें।

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