अपने आपको ठगा महसूस कर रहे लौकी की बुवाई करने वाले किसान

लखनऊः लौकी के किसान इस बार अपने आपको ठगा महसूस कर रहे हैं। जिस फसल में बड़ी कमाई की उम्मीद थी, उसमें मायूसी लग रही है। माना जा रहा है कि इसका बड़ा कारण लॉकडाउन रहा है।

किसान जिस लौकी की फसल पर एतराज कर रहे थे, उसमें कीड़ों ने डंक मार दिए। तमाम दवाओं के बाद भी इन कीड़ों पर कोई असर नहीं दिखा। किसानों का कहना है कि पहले तो बीज उग ही नहीं रहा था। जब इसके अंकुर फूटे, तब गर्मी आने लगी थी। शुरूआत में एक-दो फल निकले और बाद में पौधे बेकार होने लगे। जिन किसानों ने पौधे उखाड़े नहीं, उनमें पुनः फल आने लगे। किसानों का कहना है कि यह बीज ही बेकार थे, अन्यथा एक साथ फल आते हैं।

नन्हे फलों पर किसी की नजर भी नहीं गई और उनमें कीड़े हावी हो गए। यह फल स्वाद में भी बेकार हैं। एक बार पहचान वाले किसान से लौकी खरीदने पर कोई दोबारा ऐसी लौकी नहीं खरीद रहा है। यही कारण है कि यह सस्ती भी बिक रही हैं। माना जा रहा है कि दो सालों में किसानी की तरफ ध्यान नहीं दिया गया। इससे अच्छे और शोधित बीज बाजार में नहीं आए।

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जो बीज पहले के थे, उनकी गुणवत्ता कम हो गई। यह तो हमेशा से होता आया है कि बीज नया ही बोते रहे हैं। गर्मी और बारिश में वह लौकी खूब बिकती है, जो सर्दी के अंत में बोई जाती है। किसानों का मानना है कि इन दिनों भी लॉकडाउन का दंश झेला जा रहा है, तो फिर सर्दी के मौके पर खाने वाली लौकी का बीज अच्छा ही मिलेगा, इस पर संदेह है।