यूपी विधान परिषद का चुनाव हुआ रोमांचक, 13वें उम्मीदवार ने सबको चौंकाया

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लखनऊः उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 12 सीटों के लिए चल रही चुनावी प्रक्रिया को एक निर्दलीय उम्मीदवार ने रोमांचक बना दिया है। नामांकन के अंतिम दिन महेश चंद्र शर्मा ने निर्दलीय उम्मीदवार के रुप में पर्चा दाखिल कर सब को चौंका दिया। शर्मा के नामांकन करने से विधान परिषद चुनाव में निर्विरोध निर्वाचन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और यदि मतदान की स्थिति बनी तो समाजवादी पार्टी के दूसरे उम्मीदवार के लिए खतरा भी हो सकता है।

दरअसल, विधान परिषद की खाली हो रही 12 सीटों के लिए इस समय चुनावी प्रक्रिया जारी है। नामांकन के अंतिम दिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दस उम्मीदवारों, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, पूर्व आईएएस अधिकारी अरविंद कुमार शर्मा, लक्ष्मण आचार्य, गोविंद नारायण शुक्ला, कुंवर मानवेंद्र सिंह, सलिल विश्नोई, अश्वनी त्यागी, धर्मवीर प्रजापति और सुरेंद्र चौधरी ने नामांकन किया।

इससे पहले समाजवादी पार्टी (सपा) के अहमद हसन और राजेंद्र चौधरी ने शुक्रवार को अपना पर्चा दाखिल किया था। इसी बीच नामांकन के अंतिम दिन करीब 12.30 बजे महेश चंद्र शर्मा ने निर्दलीय उम्मीदवार के रुप में नामांकन कर दिया। नामांकन पत्र में अपना दल के विधायकों ने प्रस्तावक के रूप में हस्ताक्षर किया है।

अब 19 जनवरी को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 21 जनवरी को नामांकन वापसी का अंतिम दिन है। यदि जांच में किसी उम्मीदवार का पर्चा निरस्त होता है अथवा कोई अपना नामांकन वापस लेता है तो 21 जनवरी को ही 13 में से बचे हुए 12 उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित कर दिया जाएगा। लेकिन, यदि संख्या 13 बनी रहती है तो फिर 28 जनवरी को सुबह दस बजे से मतदान होगा और शाम को पांच बजे तक परिणाम घोषित होंगे।

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मतदान की स्थिति पैदा होने पर सपा के दूसरे उम्मीदवार के लिए खतरा हो सकता है। दरअसल संख्या बल के हिसाब से भाजपा अपने सभी दस उम्मीदवारों को जिताने में सफल हो जाएगी लेकिन सपा अपने विधायकों के बल पर केवल एक उम्मीदवार ही जिता सकती है। दूसरे उम्मीदवार के लिए उसे दूसरे दलों के विधायकों के समर्थन की जरुरत पड़ेगी जो समस्या पैदा कर सकता है।