डिज्नीलैंड: कल्पनाओं और रहस्य-रोमांच का अद्भुत संसार

मूल रूप से अमेरिका के कैलिफोर्निया के एनाहिम स्थित ‘डिज्नीलैंड’ ऐसा मनोरंजन और थीम पार्क है, जहां दुनियाभर से आने वाले बच्चों के साथ-साथ बड़े भी खूब मस्ती करते हैं। यह ऐसी जगह है, जहां कल्पनाओं से भरी अनूठी दुनिया हर किसी को आनंदित करती है। ‘वाल्ट डिज्नी पार्क्स’ के स्वामित्व वाले डिज्नीलैंड की स्थापना 17 जुलाई 1955 को हुई थी। उस दिन सजीव टेलीविजन प्रसारण के साथ डिज्नीलैंड का पूर्वावलोकन किया गया था, जिसे आर्ट लिंकलेटर और रोनाल्ड रीगन द्वारा आयोजित किया गया था। उसके अगले दिन 18 जुलाई 1955 को डिज्नीलैंड को आम लोगों के लिए खोल दिया गया था, जहां एक डॉलर मूल्य का इसका सबसे पहला टिकट इसके संस्थापक वाल्ट डिज्नी के भाई ने खरीदा था। अब यहां के एक दिन के टिकट की कीमत सौ डॉलर से भी ज्यादा है।

17 जुलाई को ओपनिंग के दिन हालांकि वाल्ट डिज्नी ने ओपनिंग सेरेमनी में कुछ खास मेहमानों के अलावा कुछ पत्रकारों को ही आमंत्रित किया था किन्तु उस समारोह में करीब 28 हजार लोग पहुंचे गए थे। इनमें से आधे से भी ज्यादा ऐसे व्यक्ति थे, जिन्हें कोई आमंत्रण नहीं दिया गया था। डिज्नीलैंड के उस समारोह का सीधा प्रसारण किया गया था। लोगों की अचानक उमड़ी भीड़ के चलते चारों तरफ अव्यवस्था का आलम बन गया। पीने के पानी की कमी हो गई थी, बेहद गर्मी के चलते कुछ ही समय पहले वहां कुछ जगहों पर जमीन पर डाला गया तारकोल पिघलने से महिलाओं की सैंडिलें उसपर चिपक रही थी। जो कोल्ड ड्रिंक कम्पनी डिज्नीलैंड की उस ओपनिंग सेरेमनी को स्पांसर कर रही थी, उसने पानी की कमी होने पर नलों से पानी आना बंद होने के बाद नलों के पास ही कोल्ड ड्रिंक बेचना शुरू कर दिया था, जिससे लोगों में खासी नाराजगी उत्पन्न हो गई थी। यही वजह रही कि डिज्नीलैंड के ‘ओपनिंग डे’ को ‘ब्लैक संडे’ के नाम से भी जाना जाता है।

5 दिसम्बर 1901 को जन्मे वाल्टर एलियास वाल्ड डिज्नी द्वारा बनवाए गए डिज्नीलैंड में प्रतिवर्ष करीब एक करोड़ साठ लाख पर्यटक पहुंचते हैं, जहां अभी तक 50 करोड़ से भी ज्यादा पर्यटक पहुंच चुके हैं। इन पर्यटकों में कई देशों के राष्ट्रपति, राष्ट्राध्यक्ष तथा अनेक शाही लोग भी शामिल हैं। डिज्नीलैंड का नाम इसके संस्थापक वाल्ट डिज्नी के नाम पर ही रखा गया। ‘वाल्ट डिज्नी पार्क्स’ द्वारा ‘डिज्नीलैंड’ के अलावा ‘डिज्नीलैंड रिसोर्ट कॉम्प्लेक्स’ का भी संचालन किया जाता है और डिज्नीलैंड को इस रिसोर्ट कॉम्पलेक्स से भिन्नता प्रदान करने के लिए 1998 में डिज्नीलैंड को ‘डिज्नीलैंड पार्क’ नाम दिया गया। डिज्नीलैंड की सबसे खास बात यह है कि यहां के हर हिस्से में यहां काम करने वाले कर्मचारी सदैव चेहरे पर मुस्कराहट के साथ ही नजर आएंगे किन्तु यहां की एक जगह ऐसी है, जहां कर्मचारियों को मुस्कराने की इजाजत नहीं है। यह जगह है डिज्नीलैंड का ‘हांटेड हाउस’, जिसके बारे में कुछ लोगों का यह भी मानना है कि इसमें वास्तव में ‘भूत’ भी हो सकते हैं। कुछ समय पहले तक इस ‘हांटेड हाउस’ में पर्यटक सेल्फी स्टिक के साथ सेल्फी के लिए भी आते थे किन्तु अब इसमें सेल्फी स्टिक लेकर जाने पर पाबंदी लगा दी गई है।

वाल्ट डिज्नी चाहते थे कि वे एक ऐसे थीम पार्क का निर्माण करें, जहां माता-पिता और बच्चे, दोनों ही एक साथ आनंद ले सकें। डिज्नीलैंड के रूप में उन्होंने अपने इसी विचार को मूर्त रूप दिया। दरअसल वर्ष 1940 के आसपास की बात है, जब एकबार रविवार के दिन वाल्ट डिज्नी अपनी दोनों बेटियों डियान और भोरॉन के साथ ग्रिफिश पार्क में घूमने गए थे। हालांकि वहां दूसरे बच्चे मस्ती कर रहे थे लेकिन उनकी बेटियों को वह पार्क इतना अच्छा नहीं लगा। तब वाल्ट डिज्नी के मन में विचार आया कि क्यों न एक ऐसी जगह विकसित की जाए, जहां बच्चों के साथ-साथ बड़े भी भरपूर मस्ती कर सकें। उसी के बाद वाल्ट डिज्नी थ्रिलर और मस्ती से भरी एक ऐसी ही दुनिया के निर्माण में जुट गए। कहा जाता है कि वाल्ट डिज्नी ‘डिज्नीलैंड’ की स्थापना करने के मुकाम तक पहुंचने में करीब तीन सौ बार असफल हुए किन्तु उन्होंने हार नहीं मानी और काफी लंबे प्रयासों तथा अथक परिश्रम के बाद ‘डिज्नीलैंड’ के रूप में उनका सपना साकार हुआ, जो आज दुनियाभर में हर किसी के आकर्षण का केन्द्र बना है। असफलताओं से जूझते-जूझते सफलता के इतने बड़े मुकाम तक पहुंचने की उनकी यह कहानी ऐसे लोगों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है, जो एक-दो बार की असफलता के बाद ही हार मानकर अपने जीवन से निराश हो जाते हैं।

वाल्ट डिज्नी जब 19 साल के थे, तब उन्होंने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर एक कमर्शियल आर्टिस्ट कम्पनी की नींव रखी। उस समय वे कई अखबारों और प्रकाशकों के लिए कार्टून बनाया करते थे। 16 अक्तूबर 1923 को उन्होंने अपने भाई के साथ मिलकर ‘डिज्नी ब्रदर्स कार्टून स्टूडियो’ की नींव रखी। बहुत थोड़े ही समय में डिज्नी के कार्टून्स की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि लोग चिट्ठियां लिख-लिखकर उनके स्टूडियो में आने की इच्छा जताने लगे। उनका स्टूडियो छोटा था, इसलिए उन्होंने ऐसा थीम पार्क बनाने के अपने आइडिया को मूर्त रूप देने का निश्चय किया, जहां लोग दिनभर परिवार के साथ खूब मस्ती कर सकें। हालांकि पहले इस पार्क को स्टूडियो के पास ही तीन एकड़ जगह पर बनाए जाने पर विचार हुआ किन्तु बाद में इसे एनाहिम में 65 एकड़ के विशाल क्षेत्र में बनाया गया। डिज्नीलैंड की स्थापना के बाद वाल्ट डिज्नी दुनियाभर के मनोरंजन पार्कों में घूम-घूमकर देखते रहे कि वहां लोगों की दिलचस्पी किन-किन चीजों में है, उसी के आधार पर डिज्नीलैंड में भी वे उन सभी चीजों का समावेश करते रहे, जो लोगों को ज्यादा आकर्षित करती थी।

वैसे तो पूरा डिज्नीलैंड कल्पनाओं, रहस्य और रोमांच से भरा है, फिर भी मिकी माउस, मिनी माउस, प्रिंसेस टियाना, टिंकर बेल, गूफी, पूह जैसे डिज्नी कार्टून कैरेक्टर्स के साथ अलग-अलग थीम पर बने डिज्नीलैंड में पेड़ पर टारजन का घर, इंडियाना जोंस, टेंपल ऑफ द फॉरबिडेन आई, पायरेट्स ऑफ द कैरेबियन, माउंटेड मेंसन, पैसेंजर ट्रेन, रोमांच से भरी जंगल लाइफ, फेरिस व्हील, स्काई राइड इत्यादि हर समय आकर्षण का मुख्य केन्द्र बने रहते हैं। बच्चे टीवी पर जिस मिकी माउस और मिनी माउस को देखकर खुश होते हैं और अपना मनोरंजन करते हैं, वे उन्हें यहां जगह-जगह पर घूमते-फिरते, बातें करते और डांस करते नजर आएंगे। इस खूबसूरत मनोरंजन पार्क में ‘मिकी टूनटाउन’ में बच्चों के इन पसंदीदा कार्टून कैरेक्टर्स का घर बनाया गया है।

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हालांकि 1971 में फ्लोरिडा के ऑरलैंडो में डिज्नी वर्ल्ड, 1983 में टोक्यो में डिज्नीलैंड, 1992 में पेरिस में यूरो डिज्नीलैंड तथा 2005 में हांगकांग डिज्नीलैंड की भी स्थापना हुई है किन्तु अमेरिका के कैलिफोर्निया के एनाहिम में स्थित ‘डिज्नीलैंड’ सबसे पुराना और सबसे विस्तृत डिज्नीलैंड है, जिसका कुल क्षेत्रफल 73.5 हेक्टेयर है, जिसमें से 30 हेक्टेयर में थीम पार्क है। बताया जाता है कि यह इतना विशाल मनोरंजन पार्क है कि इसके संचालन और देखभाल के लिए यहां 65 हजार से भी ज्यादा कर्मचारी कार्यरत हैं। 2017 में मनोरंजन के उद्देश्य से यहां करीब 1.83 करोड़ पर्यटक आए थे। दुनियाभर के किसी भी अन्य मनोरंजन पार्क में एक साल में इतने ज्यादा पर्यटक कभी नहीं पहुंचे। हालांकि कोरोना काल में पिछले डेढ़ वर्षों में डिज्नीलैंड में भी पर्यटकों की संख्या पर बहुत बड़ा असर पड़ा है।

                                                                                                                योगेश कुमार गोयल