जनजातीय समुदाय का सम्मान

केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने जनजातीय समुदाय के सम्मान का नया अध्याय लिखा है। देश में पहली बार जनजातीय समाज की महिला सर्वोच्च पद पर आसीन हुई है। पहली बार जनजातीय गौरव दिवस का शुभारम्भ हुआ है। आजादी के अमृत महोत्सव में अनेक उपेक्षित राष्ट्रनायकों को प्रतिष्ठित किया जा रहा है। अमृत महोत्सव के माध्यम से राष्ट्रीय प्रेरणा का नया दिन भी घोषित किया गया। अब देश प्रतिवर्ष जनजातीय गौरव दिवस भी मनाएगा। इस दिवस का प्रथम आयोजन गत वर्ष हुआ था। तब प्रधानमंत्री मोदी ने झारखंड में बिरसा मुंडा की मूर्ति का वर्चुअल लोकार्पण किया था। इसके अलावा भोपाल में विश्वस्तरीय रानी कमलापति रेलवे स्टेशन राष्ट्र को समर्पित किया गया।बिरसा मुंडा और रानी कमलापति के महान योगदान से देश की नई पीढ़ी परिचित हुई। जनजातीय समुदाय में भगवान बिरसा मुंडा का बड़ा सम्मान है। वह राष्ट्रनायक के रूप में पूरे देश के लिए सम्मान की विभूति हैं। रानी कमलापति का भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है।

बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर, 1875 को झारखंड के खूंटी जिले के उलीहातु गांव में हुआ था। उन्होंने जनजातीय समुदाय को लामबंद कर ब्रिटिश दासता से मुक्त कराने का संकल्प लिया था। मुंडा विद्रोह को उलगुलान नाम से भी जाना जाता है। बिरसा मुंडा को 1895 में गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें दो साल के कारावास की सजा दी गई। उन्हें लोग सम्मान से धरती आबा कहते थे। खूंटी थाने पर हमला कर अंग्रेजों को चुनौती दी गई। तांगा नदी के किनारे ब्रिटिश सेना पराजित भी हुई थी। डोम्बरी पहाड़ पर संघर्ष हुआ। उन्हें चक्रधरपुर के जमकोपाई जंगल से गिरफ्तार कर लिया गया। जेल में ही उनका निधन हो गया। मध्य प्रदेश के रेलवे स्टेशन हबीबगंज भोपाल का अंतिम गोंड शासक रानी कमलापति के नाम पर नामकरण किया गया। वह 18वीं शताब्दी की गोंड रानी थीं। यह पहली बार है, जब जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देने के लिए बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

अब तक ये सेनानी स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायक रहे हैं। जनजातीय समुदाय ने प्राचीन काल से ही जम्मू-कश्मीर,मणिपुर, नागालैंड सहित सीमावर्ती क्षेत्रों में निवास किया है और देश की सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाई है। आजादी से पहले भी जनजातीय नायकों ने भारतीय स्वतंत्रता के संघर्ष में प्रमुख भूमिका निभाई। रानी कमलापति का नाम रेलवे स्टेशन से जोड़ने से गोंड समाज सहित सम्पूर्ण जनजाति वर्ग का गौरव बढ़ा है। रानी कमलापति रेलवे स्टेशन देश का पहला आईएसओ सर्टिफाइड एवं पीपीपी मॉडल पर विकसित रेलवे स्टेशन है। एयरपोर्ट पर मिलने वाली सुविधाएं इस रेलवे स्टेशन पर मिल रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भगीरथ प्रयास के बाद रानी कमलापति को पहली बार लोगों ने जाना। मोदी की पहल से यह नाम राष्ट्रीय फलक पर उभरा। आजादी के बाद देश में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर जनजातीय कला, संस्कृति, स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को गौरव एवं सम्मान प्रदान किया गया है।

भगवान श्रीराम और जनजातीय समाज का रिश्ता किसी से छुपा नहीं है। जनजातीय समाज की परंपराओं, रीति-रिवाज और जीवनशैली से प्रेरणा मिलती है। सरकार निरंतर उनके कल्याण के कार्य कर रही है। सरकार द्वारा बीस लाख जनजातीय व्यक्तियों को वनभूमि के पट्टे प्रदान किए गए हैं। जनजातीय युवाओं के शिक्षा एवं कौशल विकास के लिए देशभर में साढ़े सात सौ एकलव्य आवासीय आदर्श विद्यालय खोले जा रहे हैं। केन्द्र सरकार द्वारा तीस लाख विद्यार्थियों को हर वर्ष छात्रवृत्ति दी जा रही है। सरकार द्वारा नब्बे वन उपजों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया गया है। भारत सरकार ने जो डेढ़ सौ से अधिक मेडिकल कॉलेज मंजूर किए हैं,उनमें जनजातीय बहुल जिलों को प्राथमिकता दी गई है। इसी तरह जल जीवन मिशन के अंतर्गत जनजातीय क्षेत्रों में नल से जल पहुंचाने की योजना संचालित हो रही है। सरकार ने खनिज नीति में ऐसे परिवर्तन किए, जिनसे जनजातीय वर्ग को वन क्षेत्रों में खनिजों के उत्खनन से लाभ मिलने लगा है। जिला खनिज निधि से पचास हजार करोड़ के लाभ में जनजातीय वर्ग हिस्सेदार है।

बांस की खेती जैसे सरल कार्य को पूर्ववर्ती सरकारों ने कानूनों में जकड़ दिया था। उन्हें संशोधित कर अब जनजातीय वर्ग की छोटी-छोटी आवश्यकताओं की पूर्ति का मार्ग प्रारंभ किया गया है। मोटा अनाज जो कभी उपेक्षित था। वह भारत का ब्रांड बन रहा है। जनजातीय बहनों को काम और रोजगार के अवसर दिलवाने का कार्य हो रहा है। नई शिक्षा नीति में जनजातीय वर्ग के बच्चों को मातृभाषा की शिक्षा का लाभ भी मिलेगा। सरकार की कोशिश है कि नई पीढ़ी हमारे संग्रामों और जनजातीय नायकों के योगदान से परिचित हो सके।

डॉ. दिलीप अग्निहोत्री