बुंदेलखंड में विरासत और विकास का स्वर्णिम अध्याय

पांच वर्ष पहले तक रानी झांसी का बुंदेलखंड उपेक्षित था। यहां के लोगों ने पहले सपा और बसपा पर विश्वास व्यक्त किया था। इन पार्टियों को पूर्ण बहुमत मिलने में बुंदेलखंड का भी महत्वपूर्ण योगदान था। लेकिन यहां के लोगों की आकांक्षा पूरी नहीं हुई। चंद क्षेत्रों को विशिष्ट मानने वाली इन दलों की सरकारों ने बुंदेलखंड पर कोई ध्यान नहीं दिया। पानी की समस्या ने बुंदेलखंड को बदहाल कर दिया। कृषि और पशुपालन दोनों में लोगों को नुकसान हुआ। लोग गांव में मवेशियों को छोड़कर पलायन कर गए। निवेश के अनुकूल माहौल नहीं था। डबल इंजन सरकार से पहले यहां की समस्याओं के समाधान कोई कोई स्थाई योजना ही नहीं बनाई गई। तात्कालिक प्रयास अवश्य किए जाते रहे। नरेन्द्र मोदी ने पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद बुंदेलखंड पर ध्यान दिया। उन्होंने तात्कालिक राहत के साथ दीर्घकालिक कार्ययोजना भी बनाई। किन्तु प्रारंभिक तीन वर्षों तक प्रदेश में सपा सरकार थी। इस कारण केंद्रीय योजनाओं का उचित क्रियान्वयन नहीं हो सका। योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन शुरू हुआ। इससे बुंदेलखंड अपनी बदहाली से बाहर निकलने लगा। कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुंदेलखंड एक्स्प्रेस-वे का लोकार्पण किया है। उसके पहले डिफेंस कॉरिडोर निर्माण और उद्योगों की स्थापना कार्य का शुभारंभ किया गया था। पानी के लिए बेहाल रहने वाले बुंदेलखंड में हर घर नल से जल का सपना साकार हो रहा है।

योगी आदित्यनाथ ने कुछ दिन पहले हमीरपुर के सुमेरपुर में हिन्दुस्तान यूनीलीवर की नवनिर्मित इकाई स्प्रे ड्रायड डिटर्जेंट पाउडर संयंत्र एवं वितरण केंद्र का लोकार्पण किया था। यूनीलीवर जैसी अंतरराष्ट्रीय कम्पनी ने उत्तर प्रदेश को अपनी अल्ट्रा-मॉडर्न फैक्टरी स्थापित करने के लिए चुना। उसके प्रमुख अधिकारी ने स्वीकार किया था कि योगी सरकार के प्रयासों से यूपी में निवेश का बेहतर माहौल कायम हुआ है। इसलिए उद्योग जगत के लोग यहां निवेश के लिए उत्सुक हैं। कम्पनी अगले तीन वर्ष के दौरान सुमेरपुर में सात सौ करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेगी। लोकार्पित इकाई एक अत्याधुनिक स्प्रे ड्राइड डिटर्जेंट फैक्टरी है। यहां लोकप्रिय लॉन्ड्री ब्रांड सर्फ एक्सेल सहित प्रमुख यूनीलीवर ब्रांड उत्पादों का निर्माण होगा। अत्याधुनिक तकनीक से लैस इस नई फैक्टरी में ऑटोमेटिक स्टोरेज भी हैं और यह एक वितरण केन्द्र के रूप में भी काम करेगी।

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योगी आदित्यनाथ का मानना है कि बुंदेलखंड में ऊर्जावान प्रतिभाएं हैं और पर्यटन की अपार संभावनाएं भी हैं। कभी सूखे की मार और पेयजल के लिए तरस रहे इस क्षेत्र में आज बड़ा बदलाव आया है। यहां दशकों से लंबित सिंचाई परियोजनाएं पूरी हुई हैं। आजादी के अमृत वर्ष में हर घर नल का सपना भी पूरा होने जा रहा है। बुंदेलखंड में डिफेंस कॉरिडोर के माध्यम से औद्योगिक विकास की नई राह बनी है। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे यहां के विकास को रफ्तार देने वाला होगा। राज्य सरकार इसके किनारे औद्योगिक क्लस्टर बना रही है। सुमेरपुर का यह प्लांट उसी कड़ी में एक कदम है। यह डबल इंजन सरकार का ही करिश्मा है कि देश-विदेश के निवेशक उत्तर प्रदेश से जुड़ रहे हैं। यही निवेश अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करता है। रोजगार सृजन और सामुदायिक विकास का सहज माध्यम भी बनता है। सुमेरपुर जैसे पिछड़े कहे जाने वाले क्षेत्र में यह संयंत्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर लाखों लोगों के रोजगार का माध्यम बनेगा। बुंदेलखंड में पर्यटन विकास की भी योगी आदित्यनाथ ने कार्ययोजना बनाई है। योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में धार्मिक, प्राकृतिक और ऐतिहासिक पर्यटन को भी बढ़ावा देनी की योजनाएं बनाई हैं। इन स्थलों को विश्वस्तरीय प्रारूप में ढाला जा रहा है। अब तो पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है।

बुंदेलखंड ऐतिहासिक धरोहरों के लिए विख्यात रहा है। पूर्ववर्ती सरकारों ने कभी इस पर ध्यान नहीं दिया।झांसी, ललितपुर,जालौन, हमीरपुर,महोबा, बांदा और चित्रकूट में अनेक प्राचीन दुर्ग और किले हैं। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाले झांसी के आठ, बांदा के चार, जालौन के दो ललितपुर के सात, हमीरपुर के तीन,महोबा के पांच और चित्रकूट के दो किलों के पुरातात्विक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व से परिचय कराती कॉफी टेबल बुक भी तैयार कराई जा रही है। इन किलों के साथ ही ऐतिहासिक कालिंजर दुर्ग के लिए मुख्यमंत्री ने हाल ही में अहम ऐलान किया है। गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली राजापुर के पर्यटन विकास की कार्ययोजना पर अमल शुरू हो चुका है। संभव है विशाल परिसर वाले कई किलों में बेहतरीन होटल स्थापित किए जाएं। कालिंजर का किला साढ़े पांच सौ हेक्टेयर के विशाल भू-भाग में फैला है।

सरकार की कोशिश है कि झांसी से बरुआ सागर किले तक जाने के लिए सुगम साधन उपलब्ध कराया जाए। देखरेख के अभाव में जीर्ण-शीर्ण हो रहे बारह एकड़ परिसर वाले टहरौली किला और चार एकड़ परिसर वाली दिगारा की गढ़ी, चिरगांव किला, लोहागढ़ का किला, चम्पत राय महल, रघुनाथ राव महल को पुराना वैभव प्रदान किया जाएगा। इनके पुनरोद्धार के लिए ठोस प्रयास किए जाएगे। कुछ जगह हेरिटेज होटल विकसित किए जाएंगे। बरुआ सागर के समीप तालबेहट किले के नीचे स्थित झीलों पर वॉटर स्पोर्ट्स एडवेंचर टूरिज्म की गतिविधियों को शुरू किया जाएगा। मड़ावरा के किले और सौराई के किले पर पर्यटन की दृष्टि से पहुंच मार्ग, साइनेज तथा पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाया जाएगा। देवगढ़ दुर्ग परकोटे के नीचे बेतवा नदी में वॉटर स्पोर्ट्स की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। महावीर स्वामी अभ्यारण्य तथा बानपुर किले को इको-टूरिज्म के लिए विकसित किया जा सकता है। आनेवाले दिनों में चरखारी का मंगलगढ़ किला भी पर्यटकों को लुभाता नजर आएगा। मस्तानी महल और बेलाताल पर कैफेटेरिया की सुविधा उपलब्ध होगी।

डॉ. दिलीप अग्निहोत्री