जम्मू में अब लहलहाते दिखेंगे बिहार की शाही लीची और आम के पेड़, पौधों की मांग हुई तेज

मुजफ्फरपुरः बिहार के मुजफ्फरपुर की शाही लीची और चायना लीची के अलावा अन्य प्रजातियों की लीची की मांग अब जम्मू में होने लगी है। हाल ही में जम्मू के मुख्य उद्यान अधिकारी कार्यालय द्वारा मुजफ्फरपुर राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र को पत्र भेजकर विभिन्न प्रजातियों के करीब 2000 लीची के पौधों की मांग की है। इस मांग के बाद केंद्र ने इसकी तैयारी भी प्रारंभ कर दी है। देश और विदेशों में चर्चित बिहार की शाही लीची के जीआई टैग मिलने के बाद इसकी मांग और बढ़ी है।

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आम और लीची की खेती को प्रोत्साहित

जम्मू सरकार ने पहले भी आम और लीची की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए भागलपुर के सबौर में स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय को पत्र भेजकर आम और लीची के कुछ पौधों की मांग की थी। मुजफ्फरपुर स्थित राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ शेषधर पांडेय ने आईएएनएस को बताया कि जम्मू कश्मीर के कई इलाकों तथा पंजाब के कई इलाकों में पहले भी लीची की खेती होती है। यह कोई नई बात नहीं है। उन्होंने बताया कि पहले वहां शाही और चायना प्रजाति की ही लीची लगे हैं अब अन्य प्रजातियों के पौधों की भी मांग आई है। उन्होंने बताया कि जम्मू के मुख्य उद्यान अधिकारी कार्यालय द्वारा बेदाना, शाही, रोज सेंटेड और चाइना लीची के पौधों की मांग की गई है। फिलहाल इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है।

लीची का 45 फीसदी उत्पादन बिहार में होता है

उन्होंने कहा कि अभी ठंड के मौसम में लीची के पौधे वहां नहीं लग सकेंगे, इस कारण संभावना है कि अगले साल फरवरी महीने में मौसम अनुकूल होते ही यहां से लीची के पौधे भेज दिए जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि वहां इन पौधों को मदर नर्सरी के तौर पर विकसित किया जाएगा और उसके बाद फिर मांग के अनुसार उसे अन्य क्षेत्रों में भेजा जाएगा। केंद्र के मुताबिक भारत में पैदा होने वाली लीची का 40 से 45 फीसदी उत्पादन बिहार में ही होता है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे प्रदेशों में भी लीची की खेती होती है। अकेले मुजफ्फरपुर में 11 हजार हेक्टेयर में लीची के बाग हैं।

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