दिल्ली के फिल्म निर्माता की ‘ऑल दैट ब्रीथ्स’ को मिला बेस्ट डॉक्यूमेंट्री फिल्म का पुरस्कार

मुंबई: दिल्ली के फिल्म निर्माता शौनक सेन की फिल्म ‘ऑल दैट ब्रीथ्स’ (All that breathes) ने शनिवार को 75वें कान फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र के लिए ल’ऑइल डी’ओर (गोल्डन आई) का पुरस्कार जीता। यह लगातार दूसरा वर्ष है जब कोई भारतीय वृत्तचित्र इस पुरस्कार के साथ स्वदेश आया है। पिछले साल, मुंबई की पायल कपाड़िया ने अपनी फिल्म ‘ए नाइट ऑफ नोइंग नथिंग’ के लिए ल’ ऑइल डी’ओर जीता था।

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‘ऑल दैट ब्रीथ्स’ (All that breathes) दो भाइयों मोहम्मद सऊद और नदीम शहजाद के जीवन का अनुसरण करता है, जो दिल्ली में एक पक्षी अस्पताल चलाते हैं, जो घायल काली चीलों को बचाने के लिए समर्पित है। दो ‘चील भाई’ इन हजारों जीवों की देखभाल करते हैं, जो रोजाना दिल्ली के धुंध से भरे आसमान से गिरते हैं। ‘वेराइटी’ के अनुसार, जैसे-जैसे पर्यावरणीय विषाक्तता और नागरिक अशांति बढ़ती है, परिवार और उपेक्षित चीलों के बीच का संबंध शहर की ढहती पारिस्थितिकी और सामाजिक दोष रेखाओं को गहरा करने का एक काव्यात्मक कालक्रम बनाता है, 90 मिनट की इस डॉक्यूमेंट्री ने वल्र्ड सिनेमा डॉक्यूमेंट्री प्रतियोगिता में सनडांस में ग्रैंड जूरी पुरस्कार जीता।

पुरस्कार प्रशस्ति पत्र में कान्स जूरी ने उल्लेख किया, “ल’ ऑइल डी’ ओर एक ऐसी फिल्म में जाता है, जो विनाश की दुनिया में, हमें याद दिलाती है कि हर जीवन मायने रखता है और हर छोटी कार्रवाई मायने रखती है। आप अपना कैमरा पकड़ सकते हैं, आप एक पक्षी को बचा सकते हैं, आप सुंदरता चुराने के कुछ पलों का शिकार कर सकते हैं, यह मायने रखता है।”

जूरी ने कहा, “यह तीन डॉन क्विक्सोट्स के अवलोकन में एक प्रेरणादायक यात्रा है जो पूरी दुनिया को नहीं बचा सकते हैं, लेकिन अपनी दुनिया को बचा सकते हैं।” दिल्ली में सोने के लिए जगह की तलाश कर रहे बेघर लोगों के बारे में उनकी 2016 की डॉक्यूमेंट्री ‘सिटीज ऑफ स्लीप’ के बाद सेन की दूसरी परियोजना ‘ऑल दैट ब्रीथ्स’ (All that breathes) है।

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